आतिशबाजी से बिगाड़ी आबोहवा, एक्यूआई 250 पर पहुंचा
Sitapur News - सीतापुर में दीपावली के बाद हवा की गुणवत्ता बिगड़ गई है, जिससे सांस रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है। पटाखों के धुएं और शोर ने स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि...

सीतापुर। दीपावली से पहले रविवार को शहर की हवा अपेक्षाकृत बेहतर थी। दीपावली की रात हुई आतिशबाजी के धुएं और गंध से शहर की हवा की गुणवत्ता बिगाड़ दी है। इससे पर्यावरण असंतुलित हुआ है। यह हवा लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गई है। दीपावली की रात पटाखों के 80 डेसीबल से अधिक के कानफोड़ू शोर से लोग बेचैन रहे। बीते सोमवार और मंगलवार की शाम फिर आतिशबाजी के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से 175 के आसपास रहा। इस दौरान औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम) रहा। जिससे सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
शुक्रवार को 2148 मरीज जिला अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने आए। शहर की बिगड़ी हवा से दमा और सांस रोगियों को मुश्किलें हो रहीं हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक में यदि वर्षा नहीं हुई, तो अगले दो दिनों तक हवा में घुले प्रदूषक और अधिक गंभीर स्तर पर पहुंच सकते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण का मुख्य कारण पटाखों का धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और मौसम में ठंड के कारण धुंध का जमाव है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पटाखों से निकलने वाले धूलकण, कार्बन, सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड जैसे तत्व हवा में घुलकर उसे प्रदूषित कर रहे हैं। ये कण आंखों, गले, और फेफड़ों पर सीधा असर डालते हैं। सांस की बीमारी, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसारइस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे सांस संबंधी दिक्कतों, आंखों में जलन, सिरदर्द और हृदय रोग के मरीज बढ़े हैं। जिला चिकित्सालय सहित निजी अस्पतालों में इस तरह के मरीजों की भी भीड़ देखी गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि हवा में घुले प्रदूषक कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। जिसके चलते लोगों को जुकाम, खांसी (कफ) और सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रदूषण के कारण फेफड़े कमजोर हो रहे हैं, जिससे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी पुरानी सांस की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि यह गंभीर वायु प्रदूषण अगले कुछ दिनों तक स्वास्थ्य पर अपना असर दिखा सकता है। लोगों को मास्क का उपयोग करना चाहिए और जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक बाहरी गतिविधियों से परहेज करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचने, बुजुर्गों को बाहर निकलने पर मास्क पहनने की सलाह दी है।

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