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बोले सीतापुर : महिला सुरक्षा के दावों में आए दम तुरंत हो कार्रवाई, अपराध हों कम

बोले सीतापुर : महिला सुरक्षा के दावों में आए दम तुरंत हो कार्रवाई, अपराध हों कम

संक्षेप:

Sitapur News - सीतापुर जिला पिछले साल महिला अपराधों के लिए चर्चा में रहा है। 2025 में 2098 मामले दर्ज हुए, जिनमें दुष्कर्म और दहेज हत्या शामिल हैं। लहरपुर तहसील में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति चिंता का विषय है।

Jan 07, 2026 04:17 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीतापुर
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बीता साल महिला अपराधों के मामले में सीतापुर जिला सुर्खियों में रहा है। अगर प्रमुख मामलों की बात करें तो वर्ष 2025 में सांसद पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद महिला अपराधों को लेकर चर्चाओं में आए जिले के ऊपर इससे पहले भी कई दाग लग चुके हैं। साल 2009 में मछरेहटा कस्बे में प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले को लोग अभी भी भूल नहीं सके हैं। इसके अलावा जिले के अलग अलग हिस्सों से महिलाओं पर छेड़खानी, लूट, टप्पेबाजी, दहेज हत्या और दहेज को लेकर प्रताड़ित करने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं।

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अगर आंकड़ों की बात करें तों 2025 में 10 दिसंबर तक महिला अपराधों से जुड़े विभिन्न थानों में कुल 2098 मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें 124 दुष्कर्म के और 50 मामले दहेज हत्या के दर्ज किए गए। ये आंकड़े जिले में महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों की हकीकत बयां करने के लिए काफी हैं। तमाम मामलों में पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाती है। लेकिन जिले की महिलाएं कुछ ऐसी व्यवस्था की मांग कर रही हैं जो कि इनको सुरक्षा की गारंटी दे सके। सीतापुर। महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिता में है। इसके लिए सरकार की तामम इंतजाम भी किए गए हैं। जिसमें डायल 112, महिला हेल्प लाईन 181 और 1090 जैसे नंबर भी जारी किए गए हैं। यही महिलाओं के पति छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए थाना स्तर पर बाकायदा एंटी रोमियों स्क्वॉड का भी गठन किया गया है। बावजूद इसके जिले में पुलिसिया आंकड़े महिला सुरक्षा से हकीकत को बेपर्दा कर रहे हैं। 2025 में जिले में महिला अपराधों को लेकर कुल 2098 मामलें जिले के थानों में दर्ज किए गए। जिसमें दहेज हत्या, रेप और गैंगरेप जैसे जधन्य अपराध शामिल हैं। इसके अलावा जिलें में महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मिशन शक्ति अभियान भी चलाया जा रहा है। जनपद पुलिस भी जिले में महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है। महिला सुरक्षा को लेकर जिले में सबसे बुरा हाल लहरपुर तहसील का है। इस तहसील क्षेत्र में आने वाले थानों में 40 रेड स्पाट को चिंहित किया गया है। रेड स्पाट का अर्थ उन स्थानों से है जहां पर महिलाओं संबंधी अपराध ज्यादा होते हैं। एंटी रोमियो स्क्वायड द्वारा लहरपुर थाने में 11, तंबौर में 14 और तालगांव में 15 रेड स्पाट को चिंहित किया गया है। इन रेड स्पाटों में बाजार, तालाब, नहरपुल, कालेज, पार्क और मोड़ को शामिल किया गया है। यह वह स्थान हैं जहां से महिलाएं निकलने में कतराती है। महिलाओं को कहना है कि कब कौन मनचला उनसे बदतमीजी कर देगा उनको खुद नहीं पता होता। पुलिस तो कभी कभी दिख जाती है लेकिन कब कौन बदतमीजी करके भाग जाता है। वह समझ भी नहीं पाती हैं। बाजार, स्कूल कालेज या अन्य किसी काम से घर के बाहर जाने में सोचना पड़ता है। अक्सर ऐसा होता है कि पुलिस के आने के पहले ही मनचले निकल जाते हैं। हम केवल शिकायत करने भर के ही होकर रह जाते हैं। जिला मुख्यालय को कस्बों और तहसीलों को जोड़ने वाले रास्ते सूरज ढलते ही महिलाओं को अंधेरे रास्ते डराते हैं। महिलाओं ने हिंदुस्तान से बातचीत में बताया कि जिस क्षेत्र में महिला शिक्षिका की दुष्कर्म के बाद हत्या हुई थी, वह रास्ता आज भी सूरज ढलते ही सुनसान हो जाता है। खैराबाद से नैमिष जाने वाले रास्ते में मछरेहटा, बीरम बीहट, कल्ली चौराहा और नैमिष के बीच मे रास्ते में कुछ ही स्थानों पर आपको रोशनी मिलेगी। इसके अलावा पूरा रास्ता रोड लाइट न होने के चलते सुनसान रहता है। इसके अलावा खैराबाद मोड़ से आरटीओ होते हुए खैराबाद, रामकोट होते हुए मिश्रिख, नैपालापुर से हरगांव समेत कई रास्तों में पर्याप्त रोशनी का अभाव है। महिलाओं का कहना है कि इन रास्तों पर अंधेरे में अकेले या फिर पैदल सफर तय करना खतरे से खाली नहीं है। घटना हो या न हो हमें अंधेरा ही डराता रहता है। उनकी मांग है कि इन रास्तों पर जल्द से जल्द रोशनी की व्यवस्था की जानी चाहिए। 10 सितंबर 2009 काला धब्बा:10 सितम्बर 2009 की तारीख सीतापुर जिले के इतिहास में एक धब्बे की तरह दर्ज है। इस दिन लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित मुंशीखेड़ा निवासी शिक्षिका अपने घर से मछरेहटा स्थित विद्यालय पढ़ाने के लिए निकली थीं। मछरेहटा के भदेभर प्राथमिक विद्यालय पहुंचने से पहले ही उसकी दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई। मछरेहटा थाने में राजपुर खर्ग निवासी सुरेश उर्फ बाबा उर्फ चैंपियन, राजकुमार, रामशंकर, पप्पू पुत्र बजरंग उर्फ बली और चिरंजीव के विरुद्ध केस दर्ज हुआ और आरोपियों को जेल भेजा गया। पुलिस ने गंभीर प्रकरण में साक्ष्य और गवाह भी प्रस्तुत किये। मामला अदालत में विचाराधीन था। न्यायालय के आदेश पर सुरेश उर्फ चैंपियन को पुलिस ने हिरासत में लिया। अदालत के फैसले में सुरेश उर्फ चैंपियन को आजीवन कारावास के साथ पचास हजार का अर्थदण्ड भी शामिल था। हर तहसील में बने रिपोर्टिंग चौकी या महिला थाना महिलाओं संबंधी मामलों की सुनवाई के जिला मुख्यालय पर महिला थाना और तहसीलों में चौकी की व्यवस्था है। लेकिन महिलाओं की माने तो वह नाकाफी है। तहसील और कस्बों से जिला मुख्यालयों की दूरी 20-60 किमी तक है। ऐसे में रिपोर्टिंग महिला चौकी या पिंक चौकी न होने की दशा में उनको लंबा सफर तय करना पड़ता है या फिर चुप बैठना पड़ता है। उनका कहना है कि तहसील और नगर पंचायत स्तर पर रिपोर्टिंग चौकी की व्यवस्था होनी चाहिए। महिलाएं कहती हैं कि ज्यादातर मामलों में पुलिस की ओर से मुकदमा तो दर्ज कर लिया जाता है लेकिन उसके बाद आरोपी लगातार धमकी और दवाब बनाने लगते हैं। ऐसे में हम परेशान हो जाते हैं। पुलिस हमारी मदद करती है तत्काल मदद मिल पाना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में महिलाओं की मांग है कि मुकदमा लिखवाने के बाद मांग किए जाने पर उनको सुरक्षा दी जानी चाहिए। छेड़छाड़ के मामलों में एक वर्ष में 304 केस दर्ज सीतापुर। बीते एक साल में जिले में महिलाओं के साथ छेड़खानी के मामले ये बताने के लिए काफी हैं, कि शहदों में पुलिस का डर पूरी तरह से खत्म हो चुका है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार 2025 में जिले में कुल 304 छेड़छाड़ के मामलों में पुलिस ने केस दर्ज किया है। 411 मामलों में अपहरण के आरोप लगे हैं। इसके अलावा गैंगरेप के भी 61 मामले सामने आए हैं। नवंबर मोह में ही जिले के मिश्रिख इलाके में स्कूल जा रही छात्रा के साथ शोहदे ने छेड़छाड़ की। छात्रा शोहदे की हरकतों को नजरअंदाज कर आगे बढ़ गई। आरोपी ने दौड़ाकर सरेराह उसका हाथ पकड़ लिया। विरोध पर आरोपी हाथ पकड़कर छात्रा को घसीटकर अगवा करने का प्रयास करने लगा। इसी तरह लहरपुर इलाके के बसंतीपुर गांव में बसंतीपुर निवासी निर्मल और भगत नें खेत ज रही मां-बेटी के साथ छेड़छाड़ करने लगे। विरोध जताकर किसी तरह वह बेटी के साथ घर आ गई। वह घर पहुंची ही थी तभी पीछे से निर्मल और भगत भी लाठी-डंडे लेकर घर में घुस आए और मां-बेटी की पिटाई कर दी। आखिरकार पुलिस को कोर्ट के आदेश पर आठ माह बाद लहरपुर कोतवाली में केस दर्ज करना पड़ा। इसके अलावा महोली इलाके में एक किशोरी खाना देकर वह खेत से पैदल घर लौट रही थी। वह घर के पास नहर किनारे पहुंची ही थी तभी तिलकरपुर निवासी कृष्णा सिंह ने सरेराह उसका हाथ पकड़कर रोक लिया और अश्लील हरकत करने लगा। उसने विरोध जताया तो आरोपी धमकाने लगा। शोर मचाने पर आरोपी ने बाल पकड़कर घसीटकर लात-घूसों से उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद आरोपी ने पिटाई कर दी। इसके ऐसे मामलों की संख्या की संख्या दर्ज मामलों से कहीं अधिक है। लहरपुर थाने में महिला अपराध के सबसे ज्यादा दर्ज हुए केस सीतापुर। जिले में महिला अपराधों के मामलों में जिले की लहरपुर कोतवाली ने 2025 में सबसे ऊपर है। आंकड़ो की बात करें, तो जिले के विभिन्न थानों में महिला अपराधों से संबंधित कुल 2098 मामले दर्ज किए गए। जिसमें सबसे ज्यादा 142 मामले लहरपुर कोतवाली में दर्ज किए गए। ये तो वो आंकड़े है, जिनमें पुलिस ने केस दर्ज किया, लेकिन ऐसे मामलों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है, जो लोक लाज के डर से या तो कोतवाली ही नही पहुंचे, या फिर पुलिस नें इन मामलों में केस दर्ज करने की जरूरत नही समझी। ही नही अगर बात करें एंटी रोमियो स्क्वॉड द्वारा चिन्हित रेड स्पॉट की, यहां भी लहरपुर तहसील सबसे ऊपर है। लहरपुर तहसील में आने वाले थानों में सबसे ज्यादा 40 रेड स्पॉट हैं। सबसे ज्यादा तालगांव में 15, तंबौर में 14 और लहरपुर में 11 रेडस्पॉट चिन्हित किए गए हैं। यही नही लहरपुर में तीन तलाक के मामले भी बहुत आते हैं। अभी हाल के दिनों में एक कांग्रेसी नेता के खिलाफ दर्ज हुआ तीन तलाक को मुकदमा काफी सुर्खियों में रहा है। इसके अलावा भी आधा दर्जन से अधिक तीन तलाक के मामले लहरपुर में दर्ज हुए हैं। जो लहरपुर इलाके में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस के इंतजामों की पोल खोलने के लिए काफी है। हमारी भी सुनिए महिला सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस ने काम किया है। डर बना रहता है। प्रशासन को चाहिएमहिलाओं को जागरूक करने के साथ-साथ समाज को भी जागरूक करे। -रचना पुलिस की ओर चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान बेहतर है। महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। -अलका शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं। पुलिस मदद के लिए खड़ी है सरकार योजनाएं चला रही है। लेकिन पहले से कहीं कम। -सुबोध मान आए दिन महिला अपराध से जुड़े मामलें सामने आते रहते हैं। पुलिस को महिला सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए। -पूजा बोले जिम्मेदार महिला थाने पर रोज ही महिलाओं से जुड़े मामले आते रहते हैं। यहां आने वाले मामलों में पहले हमारी कोशिश रहती है, कि मामले को आपसी सहमति से हल किया जाए। परिवार ना टूटने पाए। राजी ना हाने पर मुकदमा दर्ज होता है। -मधु यादव,महिला थाना प्रभारी -प्रस्तुति - अविनाश दीक्षित