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सीतापुर

प्रेमांजलि का विमोचन, बही काव्य रसधार

हिन्दुस्तान टीम,सीतापुरPublished By: Newswrap
Tue, 03 Aug 2021 11:50 PM
प्रेमांजलि का विमोचन, बही काव्य रसधार

आयोजन

साहित्य परिषद के आयोजन में रचनाकारों का जमावड़ा

सर्वसम्मति से जिलाध्यक्ष बनाए गए डॉ. मनोज दीक्षित

सीतापुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई के तत्वावधान में लालबाग स्थित हिंदीसभा के नरोत्तम सभागार में काव्यगोष्ठी व डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव प्रेम द्वारा रचित प्रेमांजलि कहानी संग्रह का विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ लोक गीतकार कुंवर आलोक सीतापुरी, विशिष्ट अतिथि के रूप में कमलेश मौर्य मृदु, प्रेमानंद दीक्षित उपस्थित रहे। संचालन परिषद के महामंत्री अरुण शर्मा बेधड़क ने किया। सर्वसम्मति से जिलाध्यक्ष पद पर डॉ. मनोज दीक्षित का मनोनयन किया गया। साथ ही अतिथियों द्वारा डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव प्रेम द्वारा रचित प्रेमांजलि कहानी संग्रह का विमोचन किया गया।

द्वितीय सत्र में कवियित्री छाया त्यागी की वाणी वन्दना के साथ काव्यगोष्ठी का प्रारंभ हुआ। मुख्य अतिथि कुंवर आलोक सीतापुरी ने कहा- सावन सा मन फागुन सा तन यौवन मस्त बहार बनाया, राग न द्वेष प्रवीण रखें अनुराग भरा व्यवहार बनाया। कमलेश मौर्य मृदु ने कहा- दूर जाओ भले किंतु उर में रहो, सीतापुर में या बलरामपुर में रहो। डॉ. मजोज दीक्षित ने कहा- जो सोया है उसे जाकर जगाऊं कामना है ये, जगत को सत्य का मैं पथ दिखाऊं कामना है ये। इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव अम्बर ने पढ़ा- प्रेमांजलि देकर यहां सबको किया कृतार्थ, चले अनवरत साधना सफल बने हे पार्थ। आचार्य अम्बिका तिवारी अम्बुज ने कहा- प्रेमांजलि है प्रेम की साहित्यिक पहचान,

गद्य पद्य हर विधा में आप सफल श्रीमान। कवि राम किशोर श्रीवास्तव ने कहा- जब चांद बिखेरे चंदनियां आगोश में मेरे आ जाना, आंचल में छुपा लेना हमको जुल्फों का साया कर देना। अरुण शर्मा बेधड़क ने आतंकवाद को जवाब देते हुए कहा- तेरा वैभव अमर रहे मां सबक इन्हें सिखलाएंगे,

दो शीश के बदले हम सिर बीस काट कर लाएंगे। इसके अलावा बैकुंठ सागर, छाया त्यागी, वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रताप त्रिवेदी, प्रेमानंद दीक्षित, हिंदी सभा अध्यक्ष आशीष मिश्र, अवधेश शुक्ल, चन्द्रभाल राठौर, शिव प्रकाश अवस्थी, भूपेंद्र दीक्षित,मुजीब सीतापुरी, नजीब सीतापुरी, सुशील टंडन, शिवांशु सिंह, नीलम, श्रीपाल मिश्र, सुषमा मोहन पांडेय आदि कवियों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को सफल बनाया।

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