बोले सीतापुर : लालकुर्ती जाने वाली सड़क दस साल बाद भी नहीं बनी

बोले सीतापुर : लालकुर्ती जाने वाली सड़क दस साल बाद भी नहीं बनी

संक्षेप:

Sitapur News - सीतापुर में लालकुर्ती जाने वाली सड़क का हाल पिछले 10 साल से बेहद खराब है। बारिश के मौसम में गड्ढे और जलजमाव के कारण सड़कें चलने लायक नहीं रह गई हैं। स्थानीय निवासी प्रशासन से सड़क मरम्मत की गुहार लगा...

Sep 13, 2025 04:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीतापुर
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बोले सीतापुर : लालकुर्ती जाने वाली सड़क दस साल बाद भी नहीं बनी विकास के तमाम दावों और चमक-दमक भरी योजनाओं के बीच शहर की एक कड़वी हकीकत बदहाल सड़कों के रूप में सामने खड़ी है। ये सड़कें सिर्फ यातायात के साधन नहीं, बल्कि शहर की प्रगति का आईना होती हैं, लेकिन वर्षों से अनदेखी का शिकार ये सड़कें खासकर मानसून की मार के बाद इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि इन पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं है। कैप्टन मनोज पांडेय चौक से मुंशीगज जाने वाली सड़क, कैप्टन मनोज पांडेय चौक से मन्नी चौराहा होते हुए मुंशी गंज जाने वाली रोड, कजियारा चौराहा से मन्नी चौराहा जाने वाला मार्ग, घंटाघर से गुरुद्वारा होते हुए लालबाग जाने वाला मार्ग और बहुगुणा चौराहे से लालकुर्ती को जोड़ने वाली सड़क की हालत देखकर यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।

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इस स्थिति ने न केवल आम नागरिकों का जीवन मुश्किल कर दिया है, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ा दिया है। शहर से लेकर कस्बों और तहसील मुख्यालय तक विकास के तमाम दावों के बावजूद सड़कों की हालत बेहद खस्ताहाल बनी हुई है। बरसात का मौसम शुरू होते ही इन सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी भरने से हालात और अधिक खतरनाक हो गए हैं। आलम यह है कि लोगों को तय करना मुश्किल हो रहा है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। शहर की प्रमुख सड़कों में मुंशीगंज रोड, गुरुद्वारा रोड और बहुगुणा चौराहे से लालकुर्ती जाने वाली सड़क की हालत सबसे खराब है। इन मार्गों पर बने गड्ढों के कारण रोजाना हजारों लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का पता नहीं चलता, जिससे अक्सर वाहन चालक और राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि खासकर लालकुर्ती जाने वाली सड़क की दुर्दशा पिछले एक दशक से जस की तस बनी हुई है। इस मार्ग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सिर्फ एक मोहल्ले तक जाने का रास्ता नहीं है बल्कि इसी मार्ग पर पीटीसी (पुलिस ट्रेनिंग सेंटर) भी स्थित है। इसके अलावा शहर के कई स्कूलों के बच्चे रोज इसी सड़क से गुजरते हैं। लेकिन खतरनाक हालत के बावजूद इस मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं है। सरकारी स्तर पर हर बार दावा किया जाता है कि सड़कें दुरुस्त कराई जा रही हैं और आम जनता की परेशानियों को दूर किया जाएगा। लेकिन हकीकत इन दावों से बिलकुल अलग नजर आती है। शहर और तहसील की मुख्य सड़कों की हालत विकास के दावों की पोल खोलती है। लोगों का कहना है कि नेताओं और अधिकारियों के दौरे के समय कुछ हिस्सों में खानापूर्ति के लिए काम शुरू जरूर करवा दिया जाता है, लेकिन कुछ ही महीनों में वह सड़क दोबारा जर्जर हो जाती है। ऐसा लगता है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया जाता। शहर के ट्रैफिक पुलिस विभाग के अनुसार बरसात के महीनों में सड़क हादसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। टूटी सड़कों पर गड्ढों और जलजमाव की वजह से वाहन फिसल जाते हैं। कई बार राहगीर और स्कूली बच्चे चोटिल हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन सड़कों की मरम्मत तुरंत कराई जाए। खासकर लालकुर्ती मार्ग जाने वाली सड़क को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने की जरूरत है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक सुविधा का सवाल नहीं है बल्कि सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। शहर और तहसील की सड़कों की बदहाली विकास के तमाम सरकारी दावों को आईना दिखा रही है। बरसात ने इनकी हालत और बिगाड़ दी है। रोजाना हजारों लोग जान जोखिम में डालकर इन मार्गों से गुजरने को मजबूर हैं। हादसों और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि तुरंत संज्ञान लेकर इन जर्जर सड़कों को दुरुस्त कराएं, ताकि लोगों को राहत मिल सके और शहर वास्तव में विकास की राह पर आगे बढ़ सके। लहरपुर तहसील जाने वाली सड़क भी जर्जर : शहर से दूर जिले की लहरपुर तहसील में भी सड़कों का हाल कुछ अलग नहीं है। खत्रियाना चौराहे से तहसील को जोड़ने वाली सड़क इसकी जीती-जागती मिसाल है। यह सड़क तहसील, कचहरी और अन्य सरकारी कार्यालयों को जोड़ती है, जिससे यहां भी लोगों का भारी आवागमन होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण करीब 20 साल पहले हुआ था। उसके बाद से इसकी किसी ने सुध नहीं ली। स्थानीय लोगों का कहना है, कि यह सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। जलजमाव और बीमारियों का खतरा सड़कों की बदहाली का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं है। बारिश के बाद सड़कों और खाली जगहों पर होने वाला जलजमाव एक और बड़ी समस्या है। लोनियन पुरवा और शास्त्री नगर जैसे मोहल्लों में स्थिति और भी खराब है। यहां की सड़कों और गलियों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। यह रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का आदर्श स्थान बन जाता है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसे मच्छर जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। शास्त्री नगर के निवासी कहते हैं, कि मोहल्ले में हर बारिश के बाद पानी भर जाता है। खाली प्लॉट कूड़े से भरे हुए हैं, जहां पानी जमा हो जाता है। यह कूड़ा पानी में सड़ता रहता है और बदबू फैलाता है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और हम सब डरे हुए हैं कि कहीं कोई बड़ी बीमारी न फैल जाए। कई बार नगर पालिका के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ये खाली प्लॉट जो बच्चों के खेलने की जगह हो सकते थे, अब गंदगी और बीमारियों का गढ़ बन गए हैं। स्थानीय लोग मांग करते हैं कि इन प्लॉटों की नियमित सफाई होनी चाहिए और यहां जमा कूड़े को हटाया जाना चाहिए ताकि जलजमाव की समस्या से निजात मिल सके। पानी सिर से ऊपर जा रहा लोगों को चाहिए समाधान बदहाली का जिम्मेदार कौन है। स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका, या जनप्रतिनिधि। स्थानीय लोगों का मानना है कि सभी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे हैं। एक ओर विकास के बड़े-बड़े वादे करती हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल बजट आवंटित होता है, फिर भी सड़कें जर्जर क्यों हैं, यह एक बड़ा प्रश्न है। लगातार गंभीर होती इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता से की जाए जो सबसे ज्यादा खराब हैं, खासकर बहुगुणा-लालकुर्ती रोड और लहरपुर तहसील मार्ग। इन सड़कों पर गड्ढों को भरकर यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाया जाए। लालकुर्ती रोड जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं ताकि रात में होने वाले हादसों को रोका जा सके। इसके अलावा जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए नालियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और मरम्मत की जाए। स्थानीय लोगों ने कहा कि सड़कों की बदहाली के कारण काफी परेशानी होती है। हालत यह है कि जहां एक ओर खराब सड़कों से सड़कों पर जाम लगता है। जिसके कारण खासतौर से बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते। इस ओर प्रशासन के अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। हमारी भी सुनिए शहर और तहसील की सड़कों की हालत लंबे समय से बेहद खराब है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। जलभराव से लोग परेशान है। -दीपू हर में सड़कों की खस्ता हालत को दुखते हुए बच्चों को स्कूल भेजते समय रोज चिंता होती है। पानी से भरे गड्ढे नजर नहीं आते और गिरकर चोट लग जाती है। -आकाश वर्मा शह कर गुरूद्वारा रोड, शहर की प्रमुख सड़कों में सुमार है। इस सड़क पर मुख्य बाजार के अलावा कई स्कूल कालेज हैं। एक दशक से परेशानी की वजह बनी हुई है।-अभय शहर की मुंशगंज सड़क का पिछले 10 साल से यही हाल है। हम लोग काफी समय से इस सड़क के निर्माण की मांग कर रहे हैं। -आलोक शुक्ला बोले जिम्मेदार शहर की 36 सड़कों को दोबार बनाए जाने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 14 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। रास्तों से अतिक्रमण हटाने के बाद उनका निर्माण डूडा की ओर से कराया जाएगा। सड़क निर्माण का कार्य बारिश के बाद होगा। गड्ढे आदि को मलबा भरवाकर ठीक कराया जा रहा है। - वैभव त्रिपाठी, अधिशाषी अधिकारी, नपाप, सीतापुर प्रस्तुति : अविनाश दीक्षित