
बोले सीतापुर : सड़कों पर नहीं दे रहे ध्यान लाखों की आबादी है परेशान
Sitapur News - शहर की कई प्रमुख सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। घंटाघर से दुर्गा पुरवा, रम्पा रोड और मन्नी चौराहे से सिटी स्टेशन की सड़कें खतरनाक गड्ढों से भरी हैं। बारिश के बाद स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे हादसों का खतरा...
शहर की करीब आधा दर्जन सड़कों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। घंटाघर से दुर्गा पुरवा, घंटाघर से रम्पा रोड, बहुगुणा चौराहे से लालकुर्ती, मुंशीगंज मार्ग, विजयलक्ष्मी नगर में बस अड्डा से बड़ा डाकखाना जाने वाली सड़क और मन्नी चौराहे से सिटी स्टेशन तक जाने वाला मार्ग, ये सभी रास्ते बड़े-बड़े गड्ढों से पटे पड़े हैं। पहले से ही खराब इन सड़कों को इस बार की बारिश ने और भी खतरनाक बना दिया है। इन सड़कों की हालत ऐसी है कि उन पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
घंटाघर से दुर्गा पुरवा और रम्पा रोड के अलावा मन्नी चौराहे से सिटी स्टेशन जाने वाली सड़कें शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल हैं। खासकर घंटाघर से दुर्गा पुरवा और रम्पा रोड शहर के कई मोहल्लों के करीब पचास हजार की आबादी को सीधे जिला अस्पताल से जोड़ती हैं। यही नहीं घंटाघर से दुर्गा पुरवा मार्ग से तो रोजाना शहर विधायक व राज्यमंत्री गुजरते हैं मगर फिर भी इस कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर में मुख्य बाजारों से लेकर वीआईपी मोहल्लों की कई प्रमुख प्रमुख सड़कें वर्षों से जर्जर पड़ी हैं। बरसात के बाद इन सड़कों की परते उखड़कर अलग हो चुकी है। हालत यह है कि जर्जर सड़कों पर इतने गड्ढे हो गए हैं कि इस पर वाहन चलाने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं इन्हीं मार्गों से होकर निकलने वाले छात्र-छात्राओं को भी हादसे का खतरा बना रहता है। कई सड़कें तो इस कदर जर्जर हैं कि उन पर कई बार ई रिक्शा तक पलट जाते हैं। इन्हीं जर्जर सड़कों से अधिकारियों की गाड़ी ही नहीं जनप्रतिनिधि भी अक्सर निकलते हैं मगर इनकी बदहाली दूर नहीं हो पा रही है। मुख्य सड़कों की स्थिति बदहाल : शहर की जिन सड़कों की हालत सबसे ज्यादा खराब है, उनमें मुख्य रूप से घंटाघर से दुर्गा पुरवा, घंटाघर से रम्पा रोड, बहुगुणा चौराहे से लालकुर्ती, मुंशीगंज मार्ग, विजय लक्ष्मी नगर में बस अड्डा से बड़ा डाकखाना जाने वाली सड़क और मन्नी चौराहे से सिटी स्टेशन शामिल हैं। इनमें से कई सड़कें तो सालों से जर्जर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन सड़कों पर बने गड्ढे इतने गहरे हैं कि बारिश के मौसम में पानी भर जाने पर उनका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ये सड़कें खासकर दोपहिया वाहन सवारों और ई रिक्शा चालकों के लिए तो किसी खतरे से कम नहीं हैं। खराब सड़कों के कारण वाहनों के पुर्जे भी जल्दी खराब हो रहे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। इन सड़कों में से कुछ मार्ग ऐसे हैं, जो शहर की एक बड़ी आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। घंटाघर से दुर्गा पुरवा और रम्पा रोड ऐसी सड़कें हैं जो करीब 50 हजार की आबादी को सीधे जिला अस्पताल से जोड़ती हैं। यही नही इसी सड़क पर कई स्कूल कालेज भी हैं। इन सड़कों पर आए दिन लोग हादसों का शिकार होते रहते हैं। खास ई-रिक्शा या अन्य वाहनों से अस्पताल जाने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सिटी स्टेशन जाने वाली सड़कों पर वाहन भी जाने से करते हैं इनकार : मन्नी चौराहे से सिटी स्टेशन जाने वाली सड़क पर भी रोजाना हजारों की संख्या में लोगों का गुजरना होता है। ये सड़क सिटी रेलवे स्टेशन जाने के साथ हजारों की आबादी को शहर की मुख्य बाजार से जोड़ती है। जिसकी वजह से इस सड़क का महत्व और भी बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा आवाजाही वाली इन सड़कों के खराब होने से लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। खराब सड़कों के कारण गड्ढों और धूल की दोहरी मार राहगीरों को झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़कों की हालत ऐसी है कि वाहन जब भी इन पर से गुजरते हैं, तो धूल का गुबार उठता है। इससे आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को सांस लेने और आंखों से संबंधित बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है। इसके अलावा सड़कों की बदहाली के साथ ही शहर में विजयलक्ष्मी नगर वाली सड़क और मुंशीगंज की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट के इंतजाम भी बेहद खराब हैं। कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें हैं ही नहीं, और जहां लगी भी हैं, वे या तो खराब पड़ी हैं या ठीक से काम नहीं करती हैं। रात के समय इन सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है, जिससे गड्ढों का पता लगाना और भी मुश्किल हो जाता है। अंधेरे और गड्ढों का यह खतरनाक मेल रात में होने वाले हादसों की आशंका को कई गुना बढ़ा देता है। इसे लेकर शहर के लोगों काकहना है कि प्रशासन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर इन सभी सड़कों को दुरूस्त कराना चाहिए। मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कुछ दिन में ही उखड़ जाते पैच एक बड़ी समस्या यह भी है कि जब कभी मरम्मत होती है, तो वह टिकाऊ नहीं होती। कुछ ही महीनों में सड़क फिर से उखड़ जाती है। सड़क निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की जाती है। यही कारण है कि कुछ ही समय में सड़क की सतह टूटने लगती है और गड्ढे बन जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इन सड़कों की मरम्मत कभी नहीं की जाती। समय-समय पर गड्ढों को भरने या मरम्मत का काम होता तो है, लेकिन उनकी शिकायत है कि मरम्मत के बाद ये सड़कें और भी खतरनाक हो जाती हैं। जल्दबाजी में किए गए काम के कारण गड्ढे ठीक से नहीं भरे जाते और कुछ ही समय में या तो पहले से बड़े हो जाते हैं, या सड़क की सतह असमान और ऊबड़-खाबड़ हो जाती है, जिससे संतुलन खोने और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि खराब सड़कों का तत्काल निर्माण कराया जाए। बदहाल सड़कों से खराब हो रहे वाहन खराब सड़कों के कारण जहां एक ओर हादसे हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर ऐसी सड़कें वाहनों की सेहत को भी बिगाड़ रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जर्जर सड़कों पर चलने से अक्सर टायर पंचर होते हैं। इसके अलावा बार बार ब्रेक लगाने की वजह से ब्रेक शू और गाड़ियों का ड्रम घिसता है इसके अलावा टायर भी समय से पहले कमजोर हो जाता है। यहां रोजाना यात्रा करने वालों ने बताया कि महीने में तीन से चार बार गाड़ी पंचर होना सामान्य बात है। इतने से ही काम नहीं चलता बार बार लगने वाले धचकों की वजह से गाड़ियों का सस्पेंशन भी समय से पहले ही खराब हो रहा है। वाहन की चेचिस पर भी सड़कें बुरा असर डाल रही हैं। इन सबके अलावा सबसे नजदीकी असर वाहन के माइलेज पर पड़ता है। बार बार क्लच और ब्रेक का उपयोग करने से माइलेज में 10 से 15 प्रतिशत की कटौती हो रही है। इन सब चीजों का सीधा असर वाहन स्वामी की जेब पर पड़ रहा है। अगर सड़कें दुरुस्त हो तो वाहन स्वामियों को मरम्मत के नाम पर धन न खर्च करना पड़े। गड्ढा युक्त सड़कों के कारण सर्वाइकल की समस्या बढ़ी गड्ढों वाली सड़कों पर रोजाना सफर करना स्वास्थ्य के लिहाज से भी खराब है। इस रास्ते से रोज निकलने वालों ने बताया कि गड्ढेदार सड़कों पर यात्रा करने से लोगों को पीठ दर्द और गर्दन की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा तेज झटकों से सर्वाइकल जैसी बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। यदि आप गिरकर चोटिल हो रहे हैं तो यह समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा गड्ढों पर जमा पानी मच्छरों को जन्म दे रहा है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां होने का खतरा है। बरसात के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। इन रास्तों से सफर करने वालों के सामने अपने गंतव्य तक समय से न पहुंच पाना भी एक समस्या बना हुआ है। रास्ता सुगम न होने और खराब होने के चलते दूरी तय करने में समय भी ज्यादा लग रहा है। सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चे, आफिस जाने वाले लोगों के सामने यह रोज की समस्या है। बताया गया कि इस रास्ते से रोजाना सफर करने वाले लोग तय समय से 20 से 30 मिनट ज्यादा समय लेकर निकलने को मजबूर हैं। यह समय ट्रैफिक जाम, धीमी रफ्तार या गाड़ी खराब होने की स्थिति में गंतव्य तक समय से पहुंचाने में उनकी मदद करता है। हालांकि लोग समय ज्यादा लगने से खासा परेशाना हैं। उनका कहना है कि बिना किसी कारण के उनका समय बर्बाद हो रहा है। हमारी भी सुनिए जर्जर सड़कों पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गड्ढे खतरनाक साबित हो रहे हैं। रोज लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। -अब्दुल खालिद जर्जर सड़कों पर आवागमन मुश्किल हो गया है। कभी-कभी तो ई रिक्शा ही पलट जाता है और सवारियों को चोट लग जाती है। - अनवर बरसात ने इन तमाम सड़कों की हालत और भी खराब कर दी है। गड्ढों में पानी भर जाने से हादसे से लोग घायल होते हैं।- मो. समीद ईरानी घंटाघर से दुर्गा पुरवा वाली सड़क खराब है, हर दूसरे दिन कोई न कोई यहां गिरता है। बच्चे व बुजुर्गों को ज्यादा दिक्कत होती हैं। - राम किशोर बोले जिम्मेदार शहर की 34 सड़कों का जल्द ही निर्माण कराया जाएगा। 14 करोड़ की लागत से इन सारी सड़कों को बनाया जाना है। इसके लिए टेंडर भी हो चुका है। सड़कों पर अतिक्रमण है, इसके लिए नगर पालिका व सिटी मजिस्ट्रेट से कहा गया है। कोशिश है कि किसी को कोई परेशानी न हो और सड़कें भी चौड़ी हो जाएं। इन सड़कों के निर्माण से शहरवासियों की परेशानियां काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी। राकेश राठौर गुरु, नगर विकास राज्यमंत्री प्रस्तुति: अविनाश दीक्षित, आशुतोष त्रिपाठी, रमाकांत शुक्ला

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