बोले सीतापुर : बड़े शहरों से शुरू हों सीधी बस सेवाएं, ट्रेनों की भी संख्या बढ़े

Jan 15, 2026 04:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीतापुर
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Sitapur News - नैमिषारण्य धाम, जो हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, का विकास तेजी से हो रहा है। यहां पर पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें हेलीपैड निर्माण, मठों का विकास और गोमती घाट का सौंदर्यीकरण शामिल है। हालांकि, यातायात सुविधाओं की कमी और सफाई की समस्या अभी भी बनी हुई है।

बोले सीतापुर : बड़े शहरों से शुरू हों सीधी बस सेवाएं, ट्रेनों की भी संख्या बढ़े

सतयुग के तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित नैमिषारण्य धाम हिन्दू धर्मग्रन्थो में विशिष्ट स्थान रखता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखे गए 18 पुराणों में इस तपोभूमि की महत्ता की प्रप्ति होती है। वहीं इस तीर्थ को महर्षि वेदव्यास ने अष्टम वैकुण्ठ की उपाधि से भी अलंकृत किया गया है। हिन्दू धर्म की चार धाम, गंगासागर तीर्थ, पितृ कर्म यात्रा जैसी तमाम धार्मिक यात्राएं श्रद्धालुओं के नैमिष तीर्थ आकर पूजन कर्म किये बिना पूर्ण नहीं होती हैं। यहां की 84 कोस की परिधि में स्वयं देवादिदेव के साथ 33 कोटि देव व साढ़े तीन करोड़ तीर्थो का वास माना जाता है। इसके बावजूद भी नैमिष अभी भी उन ऊचाईयों को नहीं छू सका है, जहां उसे होना चाहिए था।

हालांकि इस तीर्थ स्थली को पर्यटन के मानचित्र पर उभारने को लेकर प्रदेश सरकार ने अपनी कवायदें तेज कर दी हैं। पर्यटन स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। तीर्थ स्थली नैमिषारण्य में पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इस क्रम में नैमिषारण्य धाम के विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस प्लान को एकेटीयू से संबद्ध आर्किटेक्चर कॉलेज द्वारा तैयार किया गया है। इसमें आदिशक्ति मां ललिता देवी मंदिर पर कॉरिडोर बनाने, गोमती घाट का विस्तार करने, रिवर फ्रंट बनाए जाने, गोमती आरती की व्यवस्था कराए जाने समेत मठ और कनेक्टिविटी का काम किया जा रहा है। आदिशक्ति मां ललिता देवी मंदिर पर कॉरिडोर बनाने की पहल हो गई है। इसका निमार्ण शुरू हो गया है। लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों को अभी तमाम बुनियादी सुविधाओं के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अन्य जिलों से रोडवेज बस की सुविधा नैमिषारण्य में नहीं : आवागमन के साधनों के नाम पर लखनऊ, सीतापुर और हरदोई से रोडवेज और निजी बसों का संचालन किया जाता है। इन साधनों के माध्यम से केवल आसपास के जिलों के ही श्रद्धालु यहां तक आ पाते हैं। दूसरे प्रांतों से बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु आते तो हैं, लेकिन उन्हें अपने निजी साधनों या फिर टूरिस्ट कोच की बसों से ही यहां आना होता है। यदि अन्य जिलों के लिए यहां से सीधी बस सेवाएं शुरू हो जाएं तो यहां आने वाले पर्यटकों को काफी सहूलियत होगी। इसके अलावा नैमिष में अगर रोडवेज बसअड्डे की बात करें तो ये मुख्य नगरी से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर नगर के बाहर बना हुआ है। जिसकी वजह से बस उतरने के बाद नैमिष पहुंचने के लिए पर्यटकों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जो पर्यटकों की मुश्किलों मे इजाफा कर रहा है। कहने को तो यहां पर रेलवे स्टेशन तो हैं, लेकिन इस रूट से लंबी दूरी की कोई ट्रेन नहीं गुजरती है। जिस कारण यहां पर दूसरे प्रांतों से सीधे श्रद्धालु यहां तक नहीं आ पाते हैं। उन्हे नैमिष पहुंचने के लिए सीतापुर या सिधौली या अन्य कई जगहों से साधन बदलने पड़ते हैं। वहीं दूरस्थ जिलों और प्रांतों के श्रद्धालुओं को यहां तक आने-जाने के लिए निजी वाहनों का ही प्रयोग करना पड़ता है। क्षेत्रीय कारोबारियों का कहना है कि यदि लंबी दूरी की ट्रेनें इस रूट से गुजरने लगें और उनका ठहराव भी नैमिषारण्य रेलवे स्टेशन पर हो जाए तो श्रद्धालुओं की आमद बढ़ेगी। हैलीपैड का निर्माण पूरा, जल्द शुरू होगी उड़ान : नैमिषारण्य में हेलीपौड का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। जल्द ही यहां से अयोध्या और मथुरा के लिए उड़ानें शुरू हो जाएगीं। हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो जाने से श्रद्धालुओं को आवागमन में काफी राहत मिलेगी। अगर बात करें अन्य सुविधाओं की तो आज भी यहां पर्यटकों के ठहराव के इंतजामों का भी लगातार विकास हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए ठहराव के लिए जगह कम नहीं है, लेकिन अभी नैमिष में पार्किंग की व्यवस्था नही है। जिससे पर्यटकों को अपने वाहन इधर-उधर सड़कों के किनारे खड़े करने पड़ते हैं। जिससे अक्सर जाम लगता है। वहीं इस धार्मिक नगरी में सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। अगर ये सारी सुविधाएं भी यहा आने वाले पर्यटकों को उपलब्ध हों, तो यहां की धार्मिक यात्रा पर्यटकों के लिए यादगार बन सकती है। नैमिषारण्य तीर्थ में हैं कई प्रमुख दर्शनीय स्थल नैमिषारण्य में शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर के अलावा हनुमानगढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, मनु सतरूपा तपस्थली आदि के दर्शन होते हैं। 84 कोस में फैले नैमिष के अरण्यों में जानकी कुंड, कुमनेश्वर, कुर्कुरी, मानसरोवर, कोटीश्वर, महादेव, कैलाशन, हत्या हरण, नर्मदेश्वर, दस कन्या, जगन्नाथ, गंगासागर, कपिल मुनी, नागालय, नीलगंगा, श्रृंगीऋषि, द्रोणाचार्य पर्वत, चंदन तालाब, मधुवसनक, ब्रम्हावर्त, दशाश्वमेघ, हनुमान गढ़ी, यज्ञवाराह कूप, हंस-हंसिनी, देव-देवेश्वर, रुद्रावर्त आदि तीर्थ स्थलों का दर्शन कर सकते हैं। जल्द देश के पर्यटन स्थलों में चमकेगा नैमिष जिला प्रशासन और सरकार की ओर से नैमिष के विकास का जो खाका तैयार तैयार किया गया था, काफी कुछ उसकी तस्वीर उभर कर सामने आने लगी है। जो नौमिषारण्य की एक अलग की तस्वीर पेश कर रही है। बीते कुछ सालों में नैमिष का काफी तेज से विकास हुआ है। जिसके तहत तीर्थ और मंदिरों के सौन्दयाीर्करण के अलावा यहां आने वाले पर्यटकों की हर सुविधा का ध्यान रखा गा है। नैमिष विकास की अगर बात करें तो, यहां हैली पौर्ड बन कर तैयार हो चुका है। गोमती राज घाट का निर्माण व सौन्दर्यीकरण का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। वहीं व्यास गद्दी के पास ध्रुव तालाब का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। इसके अलावा चक्रतीर्थ के तीन प्रवेश द्वार बनने हैं। जिनमें से दो काम पूरा हो चुका है। मुख्य प्रवेश द्वार का काम अंतिम चरण में है। नैमिष आने वाले श्रद्वालुओ के ठहरने के लिए 500 बेडों की डॉरमेट्री भी करीब-करीब बन कर तैयार है। इसके अलावा ट्रैक्टर पार्किंग करीब-करीब बन कर तैयार हो चुकी है। वहीं नैमिष में दो पार्किंग स्थलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जल्दी ही श्रद्वालुओं को कई सुविधाएं मिलेंगी। आदि गंगा गोमती उपेक्षित अस्तित्व पर मंडरा रहा है संकट सरकार ने प्रदेश में बहनी वाली तमाम नदियों को पुर्नजीवित करने और स्वच्छ बनाने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। बावजूद इसके नैमिषारण्य की धरती से होकर गुजरने वाली आदि गंगा के नाम से जानी जाने वाली गोमती नदी पूरी तरह से उपेक्षित है। आज गोमती नदी इस स्थिति में आ गई है, कि उसका अस्तित्व आज खतरे में आ रहा है। नदी की लहरों का वेग उपेक्षा की लहरों में सिमट गया है। कभी अपनी पवित्रता के लिए जानी जाने वाली गोमती नदी को इस समय एक बृहद सफाई अभियान की दरकार है। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते श्रद्धालुओं ने गोमती के कई घाटों को ही छोड़ दिया है। दूसरों के पाप धोने वाली आदि गंगा गोमती खुद लालफीताशाही में उलझ कर बह रही है। कभी हजारों एकड़ भू-भाग को संचित करने वाली गोमती की स्वच्छ अविरल धारा आज अपने संरक्षण की राह तक रही है। हवन सामग्री, फूल, देव-देवी प्रतिमाओं सहित मृत शरीरों के विसर्जन के बाद इस पावन नदी का जल नहाना तो क्या आचमन के लायक भी नहीं बचा है। प्रदूषण के चलते इस नदी में पलने वाले जलचरों के जीवन अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। प्रदूषण और जल स्तर की कमी से जूझ रही इस नदी का अस्तित्व ही संकट में आ गया है। जिसे दूर करने के लिए अनेक संगठनों सहित पर्यावरण वैज्ञानिक लगातार मुहिम चला रहे हैं। बोले लोग नैमिष तीर्थ नगरी के चहुंमुखी विकास के लिए सरकार ने जो कटिबद्धता दिखाई है, उसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ बधाई के पात्र हैं। - स्वामी विमलानंद सरस्वती महाराज नैमिष में बसअड्डा कस्बे से तीन किमी दूर है। जिससे बस से आ रहे श्रद्धालु को डग्गामार वाहनों से आना पड़ता है। - संतोष दास महंत बनगढ़ आश्रम सरकार नैमिष तीर्थ नगरी पर ध्यान दे रही है, तीर्थ का कॉरिडोर के रूप में विकास हो रहा हैं। कई काम हो रहे। - नारायण दास महंत पहला आश्रम तीर्थ नगरी में अभी कार्य चल रहे हैं, जब इसका संपूर्ण विकास हो जाएगा तो पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी और कारोबार भी बढ़ेगा। - उत्तम सैनी बोले जिम्मेदार प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य का विकास तेजी से कराया जा रहा है। नैमिष के विकास को लेकर कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। तीर्थ क्षेत्र के सभी विकास एवं निर्माण कार्य को चरणवार शीघ्र ही शुरू करा दिया जाएगा। जिसके बाद सीतापुर जिले का नैमिषारण्य तीर्थ पर्यटन के मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान के साथ उभरेगा। डॉ. कल्याण सिंह, उप निदेशक, पर्यटन कल्याण प्रस्तुति: अविनाश दीक्षित

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