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सीतापुर

तरल जैव उर्वरक से बढ़ेगा उत्पादन: डॉ. सचिन

हिन्दुस्तान टीम,सीतापुरPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 03:02 AM
तरल जैव उर्वरक से बढ़ेगा उत्पादन: डॉ. सचिन

प्रदर्शन

कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया द्वारा कई गांवों में किया गया प्रदर्शन

रासायनिक उर्वरक की जगह जैविक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा

मानपुर। कृषि विज्ञान केन्द्र-द्वितीय कटिया द्वारा तरल जैव उर्वरक हेलो एजो, हेलो पीएसपी, हेलो जिंक व हेलो मिक्स का प्रदर्शन कृषक प्रक्षेत्र पर किया गया। इसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरकता के साथ उत्पादकता को बढ़ाना है।

केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. सचिन प्रताप तोमर ने बताया कि विकास खण्ड बिसवां के ग्राम पडरिया में कृषक सुनील कुमार, रामस्वरूप यादव व रामेन्द्र कुमार तथा हरगांव विकास खण्ड के ग्राम नौनेर के ज्ञानेन्द्र कुमार के प्रक्षेत्र पर धान की फसल में तरल जैव उर्वरक का प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरकता व उत्पादकता में प्रतिदिन हानि होती जा रही है। इसलिए वर्तमान समय में जैविक खेती की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के स्थान पर जैविक खाद व अन्य जैविक उत्पादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरकता के साथ-साथ उत्पादकता को बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है। इन जैविक उत्पादों में एक तरल जैव उर्वरक है। तरल जैव उर्वरक में उपयोगी सूक्ष्म जीवाणु होते हैं, जो वातावरण से नाइट्रोजन के अवशोषण को बढ़ाते हैं और अघुलनशील फॉस्फेट को घुलनशील बनाकर उसे पौधों को उपलब्ध कराते हैं।

कम लागत में तरल जैव उर्वरक के विशिष्ट लाभ:

केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. दयाशकंर श्रीवास्तव ने बताया कि उत्पादन में वृद्धि व रासायनिक उर्वरकों की तुलना में कम लागत के रूप में तरल जैव उर्वरक के विशिष्ट लाभ हैं। तरल जैव उर्वरक द्वारा मृदा को लगभग 25-30 किग्रा प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन एवं 15-20 किग्रा प्रति हेक्टेयर फास्फोरस उपलब्ध कराना तथा मृदा की भौतिक एवं रासायनिक दशाओं में सुधार लाना हैं, जिससे फसलों की पैदावार में वृद्धि होती है। इन उर्वरकों से पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस व जिंक की आपूर्ति होती हैं। तरल जैव उर्वरक मनुष्य, प्राणी व वनस्पति के लिए विषैला नहीं है।

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