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धर्म का ही स्वरूप है क्षमा: धनन्जय पाण्डेय

हिन्दुस्तान टीम,सीतापुरNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 11:15 PM
धर्म का ही स्वरूप है क्षमा: धनन्जय पाण्डेय

श्रीराम कथा

सूतगद्दी मंदिर में महंत मनीष शास्त्री के सानिध्य में चल रही कथा

जिला सहित विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं ने किया प्रतिभाग

नैमिषारण्य। ‘क्षमा धर्म का ही स्वरूप है। स्वयं को राज्याभिषेक से वंचित कर 14 वर्ष का वनवास दिलाने वाली, पिता के आकस्मिक निधन का कारण बनने वाली और सारी अयोध्या की प्राणप्रिय प्रजा को शोक सागर में धकेलने वाली कैकेयी को राम जैसा विरला धर्मावतार ही क्षमा कर सकता है। स्वयं भरत अपनी जिस जननी को क्षमा नहीं कर सके, उनके प्रति राम ने लेशमात्र भी कभी क्षोभ प्रकट नहीं किया। क्षमा के उदात्त मूल्य का यह परिपालन राम द्वारा ही संभव है।

ये प्रवचन तीर्थ स्थित सूतगद्दी मन्दिर में महन्त मनीष शास्त्री के सानिध्य में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य धनंजय पाण्डेय ने दिए। कथा व्यास कहते हैं कि भक्त को सरल और निष्कपट भाव से सदा संतुष्ट रहना चाहिए। उसे लाभ, हानि, सुख-दुख आदि से ऊपर उठ जाना चाहिए। जो प्रभु को सर्वव्यापक मानता है और जिसे हर व्यक्ति में परम पिता का प्रकाश समाया हुआ दिखाई देता है, वह सपने में भी किसी छल-कपट का व्यवहार नहीं कर सकता। जो अपनी इच्छा को प्रभु (राम) की इच्छा अधीन कर देता है, उसे लोक-परलोक के सुख प्राप्त हो जाते हैं और वह अनंत राम यानी प्रभु में समा जाता है। कथा में मुख्य यजमान शर्मा परिवार लुधियाना पंजाब, बाराबंकी, महोली, सीतापुर समेत विभिन्न स्थानों से आये श्रोताओं ने रामकथा का रस पान किया। इस अवसर पर आचार्य सुनील पाण्डेय, नवाब गुरु, अमन शास्त्री समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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