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सीतापुर

सीएमओ ने माना- झोलाछाप ने ली पांच की जान

हिन्दुस्तान टीम,सीतापुरPublished By: Newswrap
Thu, 05 Aug 2021 03:01 AM
सीएमओ ने माना- झोलाछाप ने ली पांच की जान

सीतापुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी माना है कि झोलाछाप के गलत इलाज के कारण पांच लोगों की जान जा चुकी है। ये हाल अकेले अंगरासी गांव का है, जहां डेढ़ माह से मौतों का सिलसिला कायम है। कारणों को जानने के लिए 583 व्यक्तियों को उपचारित किया गया है।

जिले में छह माह के भीतर दो स्थानों पर सिलसिलेवार मौतें हुई हैं। पहले खैराबाद कस्बा इस जद में आया। फिर परसेण्डी ब्लॉक का अंगरासी गांव शामिल हुआ। गांव के लोगों का दावा है कि इस डेढ़ माह के भीतर 17 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग नौ व्यक्तियों की पुष्टि कर रहा है। सीएमओ डॉ. मधु गैरोला का कहना है कि झोलाछाप के गलत इलाज के कारण पांच लोग अपनी जान गवां चुके हैं। दो ऐसे भी हैं, जिनके अज्ञात कारण हैं। ह्दयाघात और डूबने से एक-एक की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि नौ व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। 583 ऐसे भी हैं, जिन्हें उपचारित किया गया है। सीएमओ का कहना है कि गांव में किसी भी तरह का संक्रमण नहीं फैला है। अब अगर सीएमओं के दावों की बात सच मानी जाए तो ग्रामीणों के बुखार और दस्त आने की बात कहीं न कहीं दावों पर सवाल खड़े कर रही है। एक गांव में पांच लोगों की झोलाछाप के गलत इलाज से हुई मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

ग्रामीण बोले-कैंप लगा लेकिन बुखार बरकरार

अकबरपुर। गांव वासी पंकज त्रिपाठी का दावा है कि गांव में अभी भी बुखार और दस्त के अधिकतर मरीज हैं। दस ऐसे भी हैं, जो गंभीर हैं। गौतम त्रिपाठी कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के कैंप लग चुके हैं। दवाएं तो वितरित हुईं लेकिन सेहत में सुधार नहीं हो सका। रामखेलावन का कहना है कि गांव के कई लोगों का इलाज झोलाछाप द्वारा किया जा रहा है क्योंकि वे लोग नर्सिंग होम जाकर वहां से दवा लाने में सक्षम नहीं है।

एसडीएम ने जाना हाल:

एसडीएम प्यारेलाल ने गांव का निरीक्षण किया। निर्देश दिए कि गांव के बाहर बने तालाब की मनरेगा से सफाई की जाए, मनरेगा मजदूरों से मजरों में भी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित हो।

इनकी हो चुकी है मौत:

सुरजऊ, फुलछारा, स्वामीदयाल, जयकोरा, अनस, फकीरा, शानू, रेखा, राजू, शिवांगी, शमा, रामकली, चन्द्रकली, रामभरोसे, जहूरा बानो और शेखवापुर में रामकुमार और नंद किशोर दम तोड़ चुके हैं।

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