डॉक्टरों का प्रमाणपत्र पंजीकरण तक सीमित, अल्ट्रासाउंड कर रहा कोई और
Siddhart-nagar News - सिद्धार्थनगर में केवल 87 पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं, जबकि कई अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर अप्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है, जिससे लोगों की जान को खतरा है। आरटीआई कार्यकर्ता ने इस मामले की जांच की मांग की है।

सिद्धार्थनगर, हिन्दुस्तान टीम। जिले में डॉक्टरों का प्रमाणपत्र सिर्फ पंजीकरण तक ही सीमित है जबकि अल्ट्रासाउंड कोई और कर रहा है। इतना ही नहीं गंभीर मामलों का अल्ट्रासाउंड अप्रशित हाथों से हो रहा है। इससे लोगों के जान का भी खतरा है। आरटीआई कार्यकर्ता देवेश मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, एडी हेल्थ, डीएम व सीएमओ को पत्र भेज कर मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। दरअसल जिले में सिर्फ 87 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत हैं जबकि कई अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। पंजीकृत केंद्रों में से आधे से अधिक अल्ट्रासाउंड केंद्र दूसरे जिले के डॉक्टरों के नाम पर हैं।
इनमें इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, मऊ, बस्ती, गोपालगंज, बलरामपुर, देवरिया, आगरा, लखनऊ, कानपुर, सोनभद्र, बहराइच, रोहतास, देलही, गाजियाबाद, बाराबंकी फतेहपुर आदि जिलों के डॉक्टरों के नाम पर अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। इन सेंटरों पर कुछ डॉक्टरों का समय भी निर्धारित है पर कुछ का नहीं है। जिन डॉक्टरों के नाम से अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत है उनमें से अधिकतर डॉक्टर केंद्रों पर आते ही नहीं है। उनका प्रमाणपत्र सिर्फ पंजीकरण कराने तक ही सीमित है और उनके स्थान पर केंद्रों पर अप्रशिक्षित हाथों से धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड हो रहा है। जनपद में पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भी जांच की जाएगी। जांच में जिस चिकित्सक के नाम पर अल्ट्रासाउंड का पंजीकरण है, उसके मौके पर न मिलने पर तत्काल पंजीकरण रद्द किया जाएगा। साथ ही अगर पंजीकृत चिकित्सक की बजाए दूसरे चिकित्सक या अन्य स्टॉफ की ओर से पंजीकरण की बात सामने आती है तो संबंधित संचालक के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी। डॉ. मानवेंद्र पाल, नोडल अधिकारी, पीसीपीएनडीटी
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