
हिस्ट्रोपैथोलॉजी, लैप्रोस्कोपी व नेत्र विभाग में करोड़ों की मशीनें फांक रही धूल
Siddhart-nagar News - चित्र परिचयनिज संवाददाता। जनपद के मेडिकल कॉलेज व सीएचसी-पीएचसी पर मरीजों की जांच करने के लिए करोड़ो रुपए की मशीनें खरीदी गई है, लेकिन यह मशीनें धूल फा
सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। जनपद के मेडिकल कॉलेज व सीएचसी-पीएचसी पर मरीजों की जांच करने के लिए करोड़ो रुपए की मशीनें खरीदी गई है, लेकिन यह मशीनें धूल फांक रही है। इसके चलते बीमारी तीमारदारों की जेब पर बड़ा बोझ बना है। मेडिकल कॉलेज के हिस्ट्रोपैथोलॉजी, लैप्रोस्कोपी व नेत्र विभाग में करोड़ों की मशीनें लगभग साल भर से अधिक समय से कमरे में बंद पड़ी हैं। यही हाल सीएचसी-पीएचसी का भी है। करोड़ों की हेल्थ एटीएम पर जांच ठप है। सीबीसी मशीन इंस्टाल न होने से बाहरी पैथोलॉजी संचालकों की चांदी कट रही है। दरअसल, जनपद के जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद मरीजों-तीमारदारों को सेवाओं के बढ़ने की आस जगी।
शासन ने मेडिकल कॉलेज की डिमांड पर करोड़ों-करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत कर मशीनों की खरीदारी कराया। इसमें हिस्ट्रोपैथोलॉजी की जांच के लिए अलग-अलग तरह के उपकरण खरीदें गए, लेकिन मरीजों को गंभीर जांच में इन मशीनों की सेवाओं का लाभ आज तक नहीं मिल सका है। यह मशीनें बंद कमरें में लंबे समय से धूल फांक रही है। इसी तरह दूरबीन विधि से सर्जरी करने के लिए लैप्रोस्कोपी मशीन की खरीदारी की गई। इस मशीन से पित का ऑपरेशन, एपेंडिक्स, आंत में छेद आदि की सर्जरी की जाती है। यह मशीन खरीदें एक साल से अधिक का समय बीत गया, बावजूद सर्जरी विभाग ने मशीन का उपयोग करना ही उचित नहीं समझा। नेत्र विभाग में ऑपरेशन करने के लिए भी मशीनों की खरीदारी कराया गया है, लेकिन मशीनें संचालित नहीं हो सकी हैं। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, खराब हो सकता है करोड़ों का वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज में वर्तमान समय में तीन दर्जन से अधिक वेंटिलेटर है। इसमें कुछ वेंटिलेटर कोरोना काल में शासन ने भेजा था। यह सभी वेंटिलेटर कई करोड़ रुपए का है, लेकिन संचालित न होने के चलते खराब होने की आशंका बनी है। इन सभी वेंटिलेटर को चलाने के लिए मेडिकल कॉलेज में बेहोशी का चिकित्सक (एनीस्थिसिया) ही नहीं है और न ही मेडिकल कॉलेज चिकित्सक ला पा रहा है। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, एलटी पर काम का बोझ, हेल्थ एटीएम बंद स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी बर्डपुर, डुमरियागंज, इटवा, बांसी, लोटन व शोहरतगढ़ में हेल्थ एटीएम लगाया है। इसमें प्रति एटीएम की कीमत लगभग 12 लाख रुपए है। इस हेल्थ एटीएम में ब्लड सैंपल लगने के कुछ समय में एक ही समय में 12 से 32 प्रकार की बीमारियों की जांच रिपोर्ट आता है। इसे चलाने का जिम्मा लैब टैक्नीशियन को सौंपा गया है, लेकिन सामान्य जांच का बोझ अधिक होने से एटीएम पर जांच ठप पड़ा है और मशीनें इधर-उधर होकर धूल फांक रही हैं। इतना ही नहीं जनपद के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर सीबीसी की जांच के लिए महंगी लागत की इलेक्ट्रा मशीनें भेजी गई हैं, लेकिन इंस्टाल न होने से तीमारदारों की जेब ढ़ीली हो रही है। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, लैब संचालकों की सेटिंग, जेब पर बड़ा बोझ स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएचसी-पीएचसी पर गंभीर जांच के लिए मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन बाहरी लैब संचालकों के हस्ताक्षेप से मशीनें संचालित नहीं हो रही हैं। कभी मशीनें इंस्टाल होने के कुछ समय बाद बंद कर दिया जा रहा है तो कहीं इंस्टाल होने की बजाए धूल फांक रही है। विभागीय कर्मियों का कहना है कि चिकित्सक अपने कमीशन के चक्कर में मशीनों को चलने नहीं दे रहे हैं और अपने पसंदीदा लैब संचालकों के वहां भेजकर जांच करा रहे हैं। यह तीमारदारों की जेब पर बड़ा बोझ बना है। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, अब मीटिंग हाल बन गए कोविड के विशेष वार्ड कोरोना काल में शासन ने सभी ब्लॉक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष वार्ड बनवाया था। यह वार्ड आपदा के समय इस्तेमाल करने के लिए बना था, लेकिन कोरोना के खत्म होते ही वार्ड मीटिंग हाल, स्टोर रूप बनकर रह गए हैं। इसकी मुख्य उपयोगिता खत्म हो गई है। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,, जनपद के ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे हेल्थ एटीएम से मरीजों की जांच करने का सख्त निर्देश है। अगर जांच नहीं किया जा रहा है तो मामले की जांच कराई जाएगी। सीबीसी मशीन इंस्टाल कराया जा रहा है। बाहर से जांच कराने पर पूरी तरह से रोक है। डॉ. रजत कुमार चौरसिया, सीएमओ

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