कार्रवाई में 32 परीक्षार्थी अगले सत्र से भी बाहर, 36 का परिणाम रद्द

कार्रवाई में 32 परीक्षार्थी अगले सत्र से भी बाहर, 36 का परिणाम रद्द

संक्षेप:

Siddhart-nagar News - सिद्धार्थ विवि कपिलवस्तु की ओर से हुई बड़ी कार्रवाई धनों के प्रयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद

Dec 12, 2025 02:12 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सिद्धार्थ
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सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु ने बीएड परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों में बीएड सत्र 2024-25 के दौरान नकल के मामलों में पकड़े गए कुल 79 परीक्षार्थियों की विस्तृत जांच के बाद अलग-अलग स्तर पर निर्णय लिया गया है। सिद्धार्थ विवि की ओर से जांच में 32 छात्र-छात्राओं को गंभीर दोषी पाए जाने पर उनका वर्तमान सत्र का परीक्षाफल निरस्त कर दिया गया है। साथ ही इन्हें अगले परीक्षा सत्र 2025-26 में भी शामिल होने से वंचित कर दिया गया है, जो कि विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई सबसे कठोर कार्रवाई में से एक है।

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वहीं 36 परीक्षार्थियों को दोषी मानते हुए समिति ने उनका परीक्षा परिणाम (2024-25) निरस्त करने का निर्णय लिया है। जांच समिति के अनुसार इन छात्रों के लिखित उत्तर पुस्तिकाओं और परीक्षा दौरान मिले साक्ष्यों में अनुचित साधनों का उपयोग स्पष्ट रूप से पाया गया। दूसरी ओर पुनः जांच व मूल्यांकन के बाद 11 छात्र-छात्राओं को दोषमुक्त करार दिया गया है। समिति ने कहा कि इन परीक्षार्थियों के मामले में ठोस प्रमाण न मिलने के कारण इन्हें क्लीन चिट दी गई है। जांच समिति ने पूरी प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से पूरा किया। परीक्षाओं के दौरान पकड़े गए साक्ष्यों, कक्ष निरीक्षकों की रिपोर्ट और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन सहित सभी पहलुओं को शामिल किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परीक्षार्थी के साथ अन्याय न हो, इसके लिए जांच अनेक चरणों में की गई। ........... विवि परीक्षा की पवित्रता से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रकरणों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। महाविद्यालयों को भी निर्देश दिया कि परीक्षा की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करें ताकि ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। - दीनानाथ यादव, परीक्षा नियंत्रक