
श्रीमद्भागवत कथा में साधना और भक्ति का बताया महत्व
Siddhart-nagar News - बिस्कोहर नगर पंचायत के फूलपुर राजा में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य रामजस दास ने साधना, आयु और भक्ति पर चर्चा की। उन्होंने नियमित आसन और प्राणायाम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के विदुर के प्रति प्रेम और दिती की संतान की कथा भी सुनाई।
बिस्कोहर, हिन्दुस्तान संवाद। नगर पंचायत बिस्कोहर के फूलपुर राजा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार की रात अयोध्या से आए कथावाचक आचार्य रामजस दास ने साधना, आयु और भक्ति के संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लंबी आयु चाहता है उसे नियमित रूप से आसन और प्राणायाम करना चाहिए। उनके अनुसार साधना से इंद्रियां संयमित रहती हैं और मन स्थिर होता है। उन्होंने कहा कि भगवान भाव और प्रेम से ही प्रसन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि विदुर दासी पुत्र थे, फिर भी भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के वैभव को छोड़कर विदुर के घर स्नेहवश केले के छिलके तक स्वीकार किए।
कथावाचक ने कश्यप ऋषि की 13 पत्नियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बड़ी पत्नी दिती के संतान न होने पर उन्होंने कश्यप से पुत्र की कामना की। उस समय संध्या का काल था और कश्यप ने मना किया मगर दिती नहीं मानी। बाद में दिती के गर्भ से दो पुत्र हुए। हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप। कथा वाचक ने कहा कि हिरण्याक्ष के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान ने वराह अवतार धारण किया और उसे वध कर धर्म की रक्षा की। उन्होंने बताया कि प्रभु भक्तों के कार्य सिद्ध करने के लिए समय और परस्थितियों के अनुसार अनेक रूप लेते हैं। इस अवसर पर सुधीर त्रिपाठी, जनकनंदिनी देवी, राजेश अवस्थी, चन्द्र प्रकाश गुप्त, सदानंद शुक्ल, विवेक शुक्ल, प्रिंस पाण्डेय, रोहित गुप्त, सरोज यादव, लड्डू लाल भारती, बृजेश गुप्त, अरुण त्रिपाठी, विनय त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




