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शब-ए-बारात आज, गुनाहों से तौबा करने की है रात

शब-ए-बारात आज, गुनाहों से तौबा करने की है रात

संक्षेप:

Siddhart-nagar News - 02 एसआईडीडी 52: डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर स्थित सुन्नी मस्जिद की साफ-सफाई शब ए बारात को लेकर की गई है

Feb 03, 2026 02:29 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सिद्धार्थ
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सिद्धार्थनगर, हिन्दुस्तान टीम। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बरात शाबान माह की 14 तारीख को मनाया जाता है। इस्लाम धर्म के मानने वाले पूरी रात इबादत करते हुए नवाफिल नमाज के साथ तिलावत करते गुजारते हैं। मस्जिदों और कब्रिस्तानों को कुमकुमों से सजाया जाता है। कब्रस्तिानों पर पहुंच कर दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों की मगफिरत की दुआ करते हैं। गरीबों के बीच खाना व जकात-सदका दिया जाता है। पूरे जिले में शब-ए-बारात धार्मिक रूप से मनाया जाता है। मंगलवार की पूरी रात लोग जाग कर इबादत करेंगे। मस्जिदों से लेकर घरों तक नवाफिल नमाजों के साथ कुरआन पाक की तिलावत का सिलसिला जारी रहेगा।

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कहा जाता है इस रात की इबादत से अल्लाह राजी होता है। लोगों की गुनाहों को माफ करता है। इबादत के साथ कब्रिस्तानों में पहुंच कर लोग दुनिया छोड़ चुके लोगों के हक में दुआ करते हैं। हाफिज कारी इस्लामुद्दीन कहते हैं कि तमाम रातों में शब-ए-बारात की रात अफजल है। अल्लाह लोगों की दुआ कुबूल फरमाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रात को इबादत करते गुजारें। डुमरियागंज के बैदौला स्थित मदरसा दारूल उलूम गरीब नवाज के सदर हाफिज मकसूद अकरम ने बताया कि इस्लामिक मान्यता है कि बीते वर्ष किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बह्यरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तानों में अपने पूर्वजों व अपने बीच जो इस संसार से जा चुके हैं उनकी क़ब्रों की सफाई और रोशनी की जाती है। हैसियत के मुताबिक ख़ैरात करना इस रात का अहम काम है।