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करोड़ों खर्च कर बिछाई गई पाइप लाइन, फिर भी सिलेंडर से दे रहे ऑक्सीजन

करोड़ों खर्च कर बिछाई गई पाइप लाइन, फिर भी सिलेंडर से दे रहे ऑक्सीजन

शासन की मंशा लाख अच्छी हो, लेकिन जब उसे धरातल पर उतारने वाले लापरवाह हों तो जिम्मेदारों के साथ शासन को भी लोग कोसेंगे। शासन ने जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए पाइप लाइन से ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पाइपलाइन तो चार साल पहले बिछा दी, पर आज तक पाइप लाइन से किसी को भी ऑक्सीजन नहीं दिया गया। आज भी जिला अस्पताल में सिलेंडर के माध्यम से ही ऑक्सीजन दिया जा रहा है।

जिला अस्पताल का भवन जितना शानदार है उसकी व्यवस्था उतनी ही बदहाल है। हालांकि शासन की मंशा पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता है कि क्योंकि वह बेहतरी के लिए प्रयास करता दिखाई देता है। जिम्मेदार शासन की मंशा पर पलीता लगा कर खुद के साथ शासन को निशाने पर पहुंचाते हैं। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज चाहे वह जनरल वार्ड के हों या फिर प्राइवेट या इमरजेंसी के, उनके बेड तक पाइप लाइन से ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए शासन के निर्देश पर पाइप लाइन डाली जा चुकी है। पाइप लाइन बिछाए चार साल से ज्यादा का वक्त हो गया पर उससे आज तक सप्लाई नहीं हो सकी। लंबे समय से पाइप लाइन पड़ी होने की वजह से वह चोक भी हो सकती है ऐसे में दोबारा बिछाने पर खर्च करने की जरूरत आ सकती है। मरीजों को जरूरत पड़ने पर सिलेंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। पाइप लाइन से ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं दिखते हैं। हालांकि, जिला अस्पताल का दौरा पूर्व में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डी भी कर चुके हैं फिर भी स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

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ऑक्सीजन पाइप लाइन चालू है। लेकिन उससे ऑक्सीजन सिर्फ इसलिए नहीं दी जा रही है क्योंकि खर्च ज्यादा आएगा। सिलेंडर से ऑक्सीजन देने पर 60-70 हजार रुपये महीने का खर्च आता है। पाइप लाइन से सप्लाई करने पर प्रति माह तीन से चार लाख रुपये का खर्च आएगा।

डॉ. रोचस्मति पांडेय, सीएमएस, जिला अस्पताल

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  • Web Title:Pipeline spent on crores of rupees yet giving oxygen in cylinders