ड्राई पंपों के बीच खुले पंपों पर कहीं डीजल तो कहीं पेट्रोल गायब
18 एसआईडीडी 21 : शहर में तेल लेने के लिए पेट्रोलपंप पर लगी भीड़ 18 एसआईडीडी 09: त्रों में कहीं पंप बंद हैं तो कहीं पर डीजल है तो कहीं पेट्रोल उपलब्ध

सिद्धार्थनगर, निज संवददाता। जिले में तेल का संकट बना हुआ है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पंप बंद हैं तो कहीं पर डीजल है तो कहीं पेट्रोल उपलब्ध नहीं है। पेट्रोल-डीजल की क्राइसिस कंपनियों की ओर से पेट्रोल पंप संचालकों का कोटा कम करने से और अधिक बढ़ गई है। रसोई गैस की किल्लत भी वैसी ही बनी हुई है। बुक करने के बाद मिलने में 10 से 15 दिन लग जा रहे हैं।
ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध का असर
ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के बाद से ही जिले में पेट्रोल-डीजल का संकट जो खड़ा हुआ वह आज भी जारी है। तेल की कमी से कंपनियों ने भी कोटा कम कर दिया है। एक पखवारा से पंपों का कोटा 30 फीसदी कम कर दिया गया है। अगर पिछले साल पंप वाले को 12 टैंकर तेल मई माह में मिला था तो उसे इस बार आठ ही मिलना है। तेल कम होने से इसका सीधा असर वाहन चालकों व किसानों पर पड़ता दिख रहा है। एक बार तेल आने पर दोबार आने में तीन से चार दिन का वक्त लग जा रहा है इससे पंप ड्राई हो जा रहे हैं। पंपों पर तेल न होने की जानकारी होते ही लोग दूसरे की राह देख ले रहे हैं। वहां पर भी उनकी समस्या का समाधान काफी देर लाइन में लगने के बाद होगा या नहीं पता नहीं होता है क्योंकि अगर बीच में तेल खत्म हो गया तो पंप संचालक मशीन बंद कर चले जाते हैं। ऐसे भी पंप हैं जहां पेट्रोल मिल रहा है लेकिन डीजल नहीं रह रहा है। डीजल वाले वाहन चालक व किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों के लिए तेल खास कर डीजल की कमी आने वाले दिनों में मुश्किल पैदा करेगी। खेती का सीजन शुरू हो रहा है सिंचाई के लिए तेल चाहिए लेकिन डीजल की किल्लत उन्हें परेशानी में डाल सकती है।
बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही गैस
रसोई गैस की मारामारी मची हुई है। देखने में कोई दिक्कत नजर नहीं आती है क्योंकि गोदामों पर लाइन नहीं लग रही है। होम डिलेवरी की जा रही है। दिक्कत यहीं है कि बुकिंग के बाद ओटीपी भी आ जा रही है लेकिन समय से गैस नहीं मिल पा रही है। गैस मिलने में 10 से 15 दिन लग जा रहे हैं। इसके लिए भी खूब दौड़ना पड़ रहा है।
कामर्शियल गैस ने धंधा किया चौपट
कामर्शियल गैस न मिलने से या तो दुकानदार कोयला का प्रयोग कर रहे हैं या फिर बंद कर घर पर आराम कर रहे हैं। सर्वाधिक प्रभावित पटरी दुकानदार हैं। चाट, मोमोज, चाऊमीन, डोसा आदि बनाने वालों में अधिकांश के ठेले अब सड़क किनारे नहीं लग रहे हैं।
सामान्य स्थिति की कोशिश
रसोई गैस की नियमित सप्लाई आ रही है। बुकिंग के बाद ही दी जा रही है। गोदाम की बजाए होम डिलेवरी हो रही है। पेट्रोल-डीजल का कुछ संकट है लेकिन उसे भी कम करने का लगातार प्रयास चल रहा है। कोशिश है कि हालत सामान्य हो जाए।
देवेंद्र प्रताप सिंह, डीएसओ
सामान्य प्रश्न
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