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सिद्धार्थएक देशी गाय के गोबर व गोमूत्र से कर सकते हैं 30 एकड़ प्राकृतिक खेती

हिन्दुस्तान टीम,सिद्धार्थPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:51 AM
एक देशी गाय के गोबर व गोमूत्र से कर सकते हैं 30 एकड़ प्राकृतिक खेती

सोहना। हिन्दुस्तान संवाद

कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने लघु किसानों की घटती उपज पर पर जीरो बजट प्राकृतिक खेती का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि देशी गाय के गोबर व गोमूत्र से 30 एकड़ प्राकृतिक खेती की जा सकती है। इससे लागत नहीं आएगी और किसान का जीवन खुशहाल हो जाएगा।

बताया कि मौजूदा समय में किसान पूरी तरह रासायनिक खेती पर निर्भर है। इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ रही है और फसलों का उत्पादन भी उतना नहीं मिल पा रहा है जितना मिलना चाहिए। बताया कि वैज्ञानिकों ने धान की 60 से 65 कुंतल उत्पादन देने वाली प्रजातियां विकसित कर दी हैं पर किसान संतोष जनक उत्पादन नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण खेतों में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं रह गई है। छोटी जोत वाले किसान प्राकृ़तिक खेती अपनाकर कम से कम लागत लगा कर गुणवत्ता युक्त अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। बताया कि जीरो बजट प्राकृ़तिक खेती देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र पर आधारित है। एक देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से एक किसान 30 एकड़ जमीन पर प्रा़कृतिक खेती कर सकता है। देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत एवं दस प्राणि रस बनाया जाता है। जिसका फसलों पर अलग अलग तरह से प्रयोग किया जाता है।

बीजमृत

इसका प्रयोग फसलों के बीजों को बीज उपचार के लिए किया जाता है। इसको बनाने के लिए गौमूत्र पांच लीटर, गाय का ताजा गोबर पांच किलो, 50 ग्राम बुझा चुना, पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी 100 ग्राम व साफ पानी 20 लीटर मिलाकर सर्दियों में 36 घंटे व गर्मियों में 24 घंटे के बाद बीज उपचार के लिए तैयार हो जाता है। बना बीजमृत 48 घंटे में ही प्रयोग कर लेना चाहिए। बीजमृत से 20-25 किलो बीज का उपचार किया जा सकता है।

जीवामृत

जीवामृत को फसल अमृत भी कहा जाता है। इसका प्रयोग फसलों पर टनिक के रूप में फसलों पर छिड़काव करते हैं। इससे फसलें अच्छी होती है और उसमें कीड़े,मकोड़े एवं रोग भी नहीं लगते हैं। इसको बनाने के लिए गौमूत्र 10 लीटर, ताजा गाय का गोबर 10 किलो, गुड़ 1 किलो, बेसन 1 किलो, पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी 250 ग्राम, पानी 200 लीटर तथा साढ़े गले फल जैसे केला, पपीता जो भी मिल सके, इन सबको एक प्लास्टिक के ड्रम में डालकर गर्मियों में 2 दिन तथा जाड़ों में 6 दिन के बाद इसे बारीक कपड़े में छानकर 14 दिन के भीतर अपनी फसल पर छिड़काव करते रहे। इस तरह पूरी फसल के दौरान 15-20 दिन के अंतराल पर 100 लीटर पानी में 5 लीटर जीवामृत घोल को मिलाकर छिड़काव करना होता है इसके बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।

घन जीवामृत

इसको बनाने के लिए पांच कुंतल गोबर की सड़ी खाद में तैयार10 किलो जीवामृत अच्छी तरह मिलाकर ढेर बनाकर जूट के बोरों से ढक कर 6-8 दिन बाद खेत में बिखेर कर जुताई कर दें।

दस प्राणी रस

इसका प्रयोग फसलों में कीड़े मकोड़े एवं रोगों से बचाव के लिए किया जाता है। इसको बनाने के लिए गौमूत्र 20 लीटर, गाय का गोबर 2 किलो, नीम की पत्तियां 5 किलो, धतूरा की पत्ती 2 किलो, मदार की पत्ती 2 किलो, कनेर के पत्ती 2 किलो, रेड़ी की पत्ती 2 किलो, पपीता की पत्ती 2 किलो, गैदा की पत्ती 2 किलो, शरीफा की पत्ती 2 किलो, देसी आम की पत्ती 2 किलो, बेहया की पत्ती 2 किलो, 500ग्राम हल्दी पाउडर, हरी मिर्च कड़वा 500ग्राम, लहुसन पेस्ट 500 ग्राम,पत्ते वाली तम्बाकू 1 किलो, अदरक पेस्ट 500 ग्राम इन सबको 200 लीटर पानी में मिलाकर 30-40 दिन तक सड़ना चाहिए। इसके बाद बारीक कपड़े में छानकर बोत्तलो में भरकर रखना चाहिए। इस खोल को 100 लीटर पानी में 4 लीटर घोल मिलाकर छिड़काव करें।

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