
संघर्ष, साधना और सूत्रों के सम्राट रामानुजन को नमन
Siddhart-nagar News - चित्र परिचयकुमार श्रीवास्तव सीमित संसाधनों में रचा गणित का महाकाव्य नई शिक्षा नीति को रामानुजन से प्रेरणा सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। गरीबी की द
सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। गरीबी की दहलीज पर खड़े होकर भी विश्व गणित को अचंभित करने वाले महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर पूरे श्रद्धाभाव से याद किया गया। रघुवर प्रसाद जायसवाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, तेतरी बाजार में आयोजित जयंती समारोह में रामानुजन के संघर्षपूर्ण जीवन, अद्भुत प्रतिभा और कालजयी गणितीय योगदान को याद करते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में शिक्षकों ने संकल्प लिया कि रामानुजन का जीवन देश की युवा पीढ़ी के लिए सच्ची लगन और साधना का महामंत्र है। प्रधानाचार्य डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि श्रीनिवास रामानुजन ऐसी अद्भुत मेधा के धनी थे, जिन्होंने औपचारिक शिक्षा की कमी और सीमित संसाधनों को कभी अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया।

उन्होंने कहा कि रामानुजन ने जो गणितीय सूत्र दिए, उनसे आज भी विश्व के वैज्ञानिक चकित हैं। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सच्ची लगन और साधना से असंभव भी संभव हो जाता है। उनहोंने छात्रों को रामानुजन के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। बालिका विद्यालय की प्रधानाचार्या उमा सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर जोर दिया। कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में गणितीय सोच, तार्किक क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामानुजन जैसे महान वैज्ञानिकों का जीवन ही नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को व्यवहार में उतारने की सबसे बड़ी प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में गणित प्रवक्ता निमिष शुक्ल, प्रतिभा सिंह, नेहा त्रिपाठी और हिंदी विषय के सहायक आचार्य दिलीप श्रीवास्तव ने भी रामानुजन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने एक स्वर में उनके अमूल्य योगदान को राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर बताया।

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