लाखों रुपये मानदेय का भुगतान, ओपीडी एक, तीन, चार मरीज का
Siddhart-nagar News - सिद्धार्थनगर। हिन्दुस्तान टीम। स्वास्थ्य विभाग में बड़ा गड़बड़झाला पकड़ में आया है। जनपद के

सिद्धार्थनगर। हिन्दुस्तान टीम। स्वास्थ्य विभाग में बड़ा गड़बड़झाला पकड़ में आया है। जनपद के शहरी पीएचसी व शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर तैनात 23 चिकित्सक मरीजों के साथ खेल कर रहे हैं। इन चिकित्सकों को माह में मानदेय के नाम पर लगभग 23 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है, बावजूद चिकित्सक मरीज नहीं देख रहे हैं। विभाग की समीक्षा में प्रतिदिन एक, तीन व चार मरीज देखा जा रहा है। इतना ही नहीं अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक इकलौता शहरी पीएचसी पुराना नौगढ़ ब्लॉक को छोड़ किसी केंद्र ने 11 माह में हजार मरीज देखने की ओपीडी पार नहीं की है।
इससे विभाग पर सवाल खड़े हो गए हैं।दरअसल, स्वास्थ्य विभाग शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में लगा है। इसके लिए बकायदा स्वास्थ्य संबंधी स्ट्रक्चर खड़ाकर चिकित्सक व कर्मियों की तैनाती कर रखा है। जिनके माध्यम से जगह-जगह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विभाग का यह दावा खोखला साबित हो रहा है। विभाग ने जनपद के सात शहरी पीएचसी के सापेक्ष छह स्थानों पर चिकित्सक की तैनाती कर रखा है। जबकि 18 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सापेक्ष 17 पर चिकित्सक तैनात हैं, यानी की दोनों तरह के केंद्रों पर 23 चिकित्सकों की तैनाती है। इनमें प्रति चिकित्सक को प्रतिदिन 60 मरीजों की ओपीडी करने का नियम है। इसके लिए प्रति चिकित्सक को प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये का मानदेय भुगतान भी किया जा रहा है, बावजूद मरीज देखने के नाम पर खेला हो रहा है। यह चिकित्सक कई-कई दिनों तक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंच ही नहीं रहे हैं। इतना ही नहीं किसी भी चिकित्सक का किसी भी कार्य दिवस के एक दिन 60 मरीज देखने की ओपीडी नहीं है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक यानी की कुल 11 माह की ओपीडी की विभाग ने समीक्षा की है। जिसमें तैनात चिकित्सकों की पूरी पोल खुलकर सामने आई है।दहाई में भी ओपीडी नहीं, जिम्मेदार कटघरे मेंविभाग की ओर से ओपीडी का किए गए समीक्षा में आठ चिकित्सक ऐसे मिले हैं जिनकी प्रतिदिन की ओपीडी दहाई के संख्या में भी नहीं है। दो चिकित्सकों के प्रतिदिन की ओपीडी एक-एक है। इसके अलावा तीन, चार, आठ, नौ मिली है, जबकि अधिकतम 44 पाई गई है। ऐसे में प्रतिमाह लगभग 23 लाख रुपये मानदेय भुगतान होने के बाद भी ओपीडी न होने से तैनात चिकित्सकों के अलावा जांच का अधिकार पाए ब्लॉकों के अधीक्षक, प्रभारी चिकित्साधिकारी व डिप्टी सीएमओ की जिम्मेदारी सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है।शहरी पीएचसी व शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर तैनात चिकित्सकों की ओपीडी की समीक्षा डीएम स्तर पर प्रस्तुत की गई है। जिसमें सुधार करने का सख्त निर्देश दिया गया है। एक माह के भीतर चिकित्सकों की ओपीडी में सुधार न होने पर डीएम स्तर से मिले निर्देश के क्रम में सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।डॉ. रजत कुमार चौरसिया, सीएमओचिकित्सक ओपीडी एवरेज एक नजर में-केंद्र प्रतिमाह ओपीडी एवरेज प्रतिदिन ओपीडी एवरेजबढ़नी बाजार प्रथम 323 13बांसी प्रथम 556 22बांसी द्वितीय 350 14भारतभारी 186 07भीमापार 732 29बिस्कोहर 217 09डुमरियागंज प्रथम 368 15कांशीराम आवास 411 16कपिलवस्तु 429 17मधुकरपुर 66 03सनई 109 04शोहरतगढ़ प्रथम 230 09शोहरतगढ़ द्वितीय 21 01सिंहेश्वरी मंदिर 734 29उस्का बाजार प्रथम 258 10उस्का बाजार द्वितीय 206 08पीएचसी बांसी 893 36पीएचसी बढ़नी बाजार 30 01पीएचसी डुमरियागंज 988 40पीएचसी पकड़ी 473 19पुराना नौगढ़ 1111 44पीएचसी सनई 569 23पीएचसी शोहरतगढ़ 855 34कुल 460 18
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