
पंडालों में पहुंचे विघ्नहर्ता, विधि-विधान से आज होगा पूजन
Siddhart-nagar News - सिद्धार्थनगर में गणेश पूजा समारोह के लिए भगवान गणेश की प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में स्थापित किया गया। बुधवार से विधिविधान से पूजा शुरू होगी। महंगाई के चलते मूर्तियों के निर्माण की लागत बढ़ी है, जिससे...
सिद्धार्थनगर, हिन्दुस्तान टीम। गणेश पूजा समारोह को लेकर मंगलवार को जिले में कार्यक्रम स्थलों पर भगवान गणेश की प्रतिमा ले जाने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। पूजा पंडालों में गणराज के विराजमान होने के बाद संबंधित स्थानों पर बुधवार से विधिविधान से पूजन अर्चन कर गणपति बप्पा मोरया का गगनभेदी नारों से इलाका गूंजेगा। कस्बे के अलावा क्षेत्र के भवानीगंज, बेंवा, भारतभारी, बढ़नीचाफा, भनवापुर, औराताल, जखौली, बहेरिया, शाहपुर आदि जगहों पर पूरे उत्साह भरे माहौल में गणेशोत्सव पर्व मनाए जाने की रूपरेखा बनाई गई है। पहले से बुक प्रतिमा मंगलवार को श्रद्धापूर्वक ले जाकर पूजा पंडालों में स्थापित किया गया।

महंगाई पर भी लोगों का उत्साह भारी है। वहीं मूर्तिकारों की मानें तो निर्माण सामग्रियों के दाम बढ़ने से मूर्ति बनाने में लागत पर भी असर पड़ रहा है। मूर्ति निर्माण में लगने वाले रंग, पेंट, पोशाक, सजवाट के अलावा मुकुट समेत अन्य सामान की कीमतें भी बढ़ना वजह है। कारीगरों व लेबर की रोजी बढ़ गई है। यही कारण है कि मूर्तिकारों को मूर्ति के दाम बढ़ाने विवश होना पड़ता है। नए काम में होती है गणपति की पूजा डुमरियागंज श्रीरामलीला मैदान मंदिर के पुजारी राकेश शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश को बुद्धि का देवता माना जाता है। सनातन धर्म में किसी भी नए काम को प्रारंभ करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश की पूजा करने के बाद प्रारंभ होने वाला कार्य हर हाल में पूरा होगा। भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्र गणेश को विघ्न हर्ता भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मनुष्य जब भी किसी संकट में फंसता है और सच्चे मन से भगवान गणेश को याद करता है तो उसका संकट टल जाता है। वैदिक मत में सभी कार्य के आरम्भ जिस देवता का पूजन से होता है, वही विनायक हैं। भगवान गणेश विघ्न का नाश करने और मंगलमय वातावरण बनाने वाले हैं।

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