
गेहूं की पत्तियां पीली पड़ रही तो किसान बरतें सावधानी: कृषि वैज्ञानिक
Siddhart-nagar News - डुमरियागंज क्षेत्र में रबी सीजन में गेहूं की खेती की जाती है। बुवाई के 30 दिनों बाद गेहूं की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, जो नाइट्रोजन की कमी के कारण होती है। किसानों को सही समय पर सिंचाई और उर्वरक का उपयोग करना चाहिए, ताकि फसल को बचाया जा सके।
डुमरियागंज, हिन्दुस्तान संवाद। रबी सीजन के समय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती की जाती है। बुवाई के 30 दिनों का अधिक समय बीतने पर गेहूं की पत्तियों के पीला पड़ने की समस्या उत्पन्न होने लगती है जो नाइट्रोजन की कमी के कारण हो जाता है। सही समय पर सावधानी बरतते हुए किसानों द्वारा पीली पड़ रही पत्तियों का इलाज कर बचाया जा सकता है। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हल्लौर, अरनी, जखौली, जबजौवा गांव के किसान मोहम्मद अलीम, पप्पू, अम्मार हुसैन, सोमन, सितईराम आदि ने बताया कि सिंचाई के बाद गेहूं की फसल पीली पड़ रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ प्रदीप कुमार ने कहा कि गेहूं की फसल में सिंचाई के दौरान कई बार ऐसा हो जाता कि जरूरत से ज्यादा खेतों में पानी आ जाता है।
इससे गेहूं की जड़ को कई दिन हवा नहीं मिल पाती है। गेहूं की फसल के पत्ते पीले पड़ने शुरू होने लगते हैं। ऐसे में किसानों को जरूरत के हिसाब से पानी डालना चाहिए। इसके अलावा सही मात्रा में यूरिया का प्रयोग समय से न किया गया तो भी उपज में नाइट्रोजन की कमी आ जाती है। किसानों द्वारा सही मात्रा में प्रयोग कर ऐसा होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए सभी को समय समय पर बुवाई के उपरांत खेतों में पहुंचकर ध्यान रखना चाहिए। ये तरीका अपनाकर रोग से बचेगी फसल डॉ प्रदीप ने कहा कि गेहूं की पीली पड़ रही पत्तियों में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए यूरिया, अमोनियम सल्फेट, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट, एनपीके उर्वरक,एजोस्पिरिलम, एजोटोबैकटर एवं जैव उर्वरक और कार्बनिक खाद का प्रयोग कर बचाया जा सकता है।

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