
शिव-सती कथा का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Siddhart-nagar News - 01 एसआईडीडी 14: बुढ़ऊ चौराहे पर चल रहे रामकथा के दूसरे दिन कथा वाचिका कनकेश्वरी देवी ने शिव-सती चरित्र का मार्मिक वर्णन किया
सोहना, हिन्दुस्तान संवाद। भनवापुर क्षेत्र के बुढ़ऊ चौराहे पर आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीरामकथा के दूसरे दिन शनिवार रात कथा वाचिका कनकेश्वरी देवी ने शिव-सती चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। इसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने बताया कि एक बार माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन भगवान शिव के प्रति द्वेष भाव के कारण उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। यह जानकर माता सती को गहरा आघात पहुंचा। उन्होंने बिना निमंत्रण के ही यज्ञ में जाने का निर्णय लिया। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि जहां सम्मान न हो, वहां जाना उचित नहीं होता, लेकिन पिता के मोह में माता सती यज्ञ स्थल पर पहुंच गईं।
वहां राजा दक्ष ने भगवान शिव का खुलेआम अपमान किया। यह दृश्य माता सती सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने योगाग्नि के माध्यम से अपने प्राण त्याग दिए। कथा वाचिका ने बताया कि माता सती के देहत्याग का समाचार मिलते ही भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे और उनका तांडव पूरे ब्रह्मांड को विचलित करने लगा। बाद में माता सती ने पार्वती रूप में जन्म लेकर कठोर तपस्या के जरिए भगवान शिव को पुनः प्राप्त किया। कथा के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूबे रहे। इस मौके पर इन्द्रजीत उपाध्याय, अमित श्रीवास्तव, मस्तराम वर्मा, विजय उपाध्याय, अखिलेश श्रीवास्तव, अन्नू त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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