238 राजकीय नलकूपों को चलाने के लिए हैं मात्र 22 आपरेटर, कैसे हो खेतों की सिंचाई
Shravasti News - श्रावस्ती जिले में 238 राजकीय नलकूपों के संचालन के लिए केवल 22 आपरेटर हैं, जिससे सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो रही है। नलकूपों की देखरेख के लिए कोई मिस्त्री नहीं है, जिससे मरम्मत में भी देरी होती है। 29 साल बाद भी नलकूप खंड का कार्यालय नहीं है, और किसानों को सस्ती सिंचाई के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

श्रावस्ती। जिले के राजकीय नलकूपों को चलाने के लिए न तो आपरेटर और न ही मरम्मत के लिए मिस्त्री ही हैं। ऐसे में खेतों की सिंचाई कैसे हो। यहां तक कि जिला गठन के 29 साल बाद भी श्रावस्ती में राजकीय नलकूप खंड का कार्यालय तक नहीं है। नलकूप खंड बहराइच और नलकूप खंड नानपारा को नलकूपों के संचालन की जिम्मेदारी है। 238 राजकीय नलकूपों को चलाने के लिए मात्र 22 आपरेटर तैनात हैं। श्रावस्ती में उद्योग धंधे लगभग नहीं के बराबर हैं ऐसे में खेती ही एक मात्र लोगों का सहारा है। खेती के लिए सिंचाई के साधनों की बहुत जरूरत है।
इसके लिए नहर में कभी कभार ही पानी आता है और निजी पंपिंग सेट से सिंचाई महंगी पड़ती है। ऐसे में राजकीय नलकूप ही सिंचाई के लिए उपलब्ध सस्ता संसाधन है। लेकिन नलकूपों को चलाने और देख रेख के लिए आपरेटर ही नहीं हैं। जिले में कुल 238 राजकीय नलकूप लगे हैं। जिन्हें चलाने के लिए मात्र 22 आपरेटरों की ही तैनाती है। ऐसे में एक आपरेटर के जिम्मे करीब 11 नलकूप हैं। तो अनुमान लगाया जा सकता है कि नलकूपों की देख रेख और संचालन कैसे होता होगा। इन नलकूपों की देख रेख और संचालन के लिए 29 साल बाद भी जिले में नलकूप खंड का कार्यालय तक नहीं है। बहराइच और नानपारा खंड कार्यालय की जिम्मेदारी पर नलकूप चलाए जा रहे हैं।238 नलकूपों पर है करीब 50 हजार हेक्टेयर की सिंचाई का जिम्मा: जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल उत्पादन होता है। जिसमें से करीब 50 हजार हेक्टेयर अर्थात एक तिहाई क्षेत्र फल में सिंचाई का जिम्मा राजकीय नलकूपों पर है। लेकिन आपरेटरों के अभाव में नलकूप अक्सर खराब रहते हैं। जिले के जमुनहा, हरिहरपुररानी और सिरसिया के नलकूपों की देख रेख और संचालन का जिम्मा नानपारा नलकूप खंड के पास है और गिलौला तथा इकौना के नलकूपों को चलाने का जिम्मा बहराइच नलकूप खंड के जिम्मे है।नलकूपों को चलाने के लिए नहीं है राजकीय मिस्त्री: 238 राजकीय नलकूपों की मरम्मत के लिए मिस्त्री की तैनाती नहीं है। ऐसे में नलकूप खराबी की सूचना पर नलकूप विभाग निजी मिस्त्रियों के सहारे मरम्मत कराता है। ऐसे में एक बार नलकूप खराब हुआ तो मरम्मत में कई महीने लग जाते हैं। मोटर संबंधी खराबी होने पर बहराइच के वर्कशाप में मरम्मत कराया जाता है। इससे समय और खर्च अधिक लगता है।
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