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हिन्दी भारत माता के माथे की सुंदर बिन्दी है

फ्लैग- विश्व हिन्दी दिवस पर कवियों ने बताया हिन्दी को जन जन तक फैलाने की

हिन्दी भारत माता के माथे की सुंदर बिन्दी है
हिन्दुस्तान टीम,श्रावस्तीTue, 09 Jan 2024 06:10 PM
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फ्लैग- विश्व हिन्दी दिवस पर कवियों ने बताया हिन्दी को जन जन तक फैलाने की जरूरत, आम जन में रची बसी भाषा को दिया जाय महत्व

विश्व हिन्दी दिवस

-हिन्दी के कवियों और रचनाकारों ने बताया हिन्दी में हो सभी कामकाज

- विश्व स्तर पर हिन्दी का महत्व बढ़ाने के लिए आगे आएं विद्वान जन

श्रावस्ती, संवाददाता

हिन्दी की उपेक्षा से हिन्दी के कवि व रचनाकार व्यथित हैं। वहीं काम काज की भाषा में हिन्दी के बजाय अंग्रेजी का विरोध करते हैं। विश्व हिन्दी दिवस पर हिन्दी की साधना में लगे कवियों व रचनाकारों ने अपनी बेबाक राय रखी। कवियों ने बताया कि हिन्दी भारत की जन जन की भाषा है। बिना हिन्दी का प्रयोग किए हम भारत को एकजुट नहीं रख सकते। इसलिए विद्वानों को चाहिए कि भारत ही नहीं भारत के बाहर भी हिन्दी का महत्व बताएं। सभी सरकारी काम काज हिन्दी में ही हो।

कवि प्रमोद वर्मा साधक ने कहा कि हिंदी अपनी हिन्दी है न राजस्थानी न सिन्धी है, हिन्दी भारत माता के माथे की सुंदर बिन्दी है। हम हिन्दी के रखवाले,स्वाभिमान हमारा हिन्दी है, हिन्दी हिन्दी हिन्दी साधक सब कुछ मेरा हिन्दी है। वहीं कवि व रचना कार मनोज मिश्र कप्तान ने बताया कि ज्ञान विज्ञान की खान प्रमाण लिए जन के मन भावति हिंदी,उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम प्रेम सुपाठ पढ़ावति हिंदी, मैथिल, भोजपुरी, अवधी, ब्रज गोद लिए दुलरावति हिंदी, पाखहिं पाखन लाखन ह्वै नित आपन साख बढ़ावति हिंदी।

राज किशोर पाण्डेय प्रहरी ने कहा कि हिन्दी आम बोलचाल की भाषा है। इसलिए इसे अन्य भाषाओं के साथ घालमेल करके न बोला जाय। उन्होंने कहा कि जिस सरलता से हम हिन्दी में अपनी बात समझा सकते हैं उस सरलता से अन्य भाषाओं में बात नहीं समझा सकते। कवि श्रवण कुमार सायक ने कहा कि हिन्दी केवल कवि सम्मेलनों तक ही सीमित न रहे। इसे विश्व की भाषा का दर्जा मिलना चाहिए। आज विश्व भर में हिन्दी बोलने वाले मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। जबकि प्रीतम श्रावस्तवी ने बताया कि हिन्दी समृद्ध भाषा है। इसकी तुलना किसी अन्य भाषा से नहीं की जा सकती है। कवि व पेशे से पुलिस इंस्पेक्टर धर्मराज उपाध्याय ने बताया कि हिन्दी भाषा सरल और मधुर है। छोटे छोटे वाक्यों में जिस सुगमता से हम अपनी बात हिन्दी में रख सकते हैं। उस तरह से अन्य भाषाओं में नहीं रख सकते हैं।

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