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श्रावस्तीकोरोना के केस कम हुए लेकिन डर अब भी पहले जैसा

हिन्दुस्तान टीम,श्रावस्तीPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 10:00 PM
कोरोना के केस कम हुए लेकिन डर अब भी पहले जैसा

सचित्र

24 एसआरए पीआईसी 5- मिर्जापुर गांव के स्कूल में बैठे लोग

24 एसआरए पीआईसी 6- प्रेम पाल यादव

24 एसआरए पीआईसी 7- शीतल कुमार

24 एसआरए पीआईसी 8- राज श्रीवास्तव

24 एसआरए पीआईसी 9- पवन कुमार

24 एसआरए पीआईसी10- राजेश कुमार

24 एसआरए पीआईसी 11- बब्लू गुप्ता

आंकड़े-

1 हजार के आसपास है गांव की आबादी

12 से एक ज्यादा लोग अब तक हुए पॉजिटिव

फ्लैग- विकास क्षेत्र जमुनहा की ग्राम पंचायत पटपरगंज का गांव है, मिर्जापुर। यहां कोरोना के मामले तो कुछ कम हुए हैं लेकिन लोगों में डर अब भी नहले जैसा ही है। कोरोना के भय से बाहर लोग घरों से बाहर न के बराबर निकलते हैं। मिर्जापुर चौराहे की बाजार नजदीक होने के बाद भी कई लोग ऐसे हैं जो महीनों से बाजार नहीं गए हैं। यहां हाल में दो महिलाओं सहित पांच लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ये सामान्य मौतें थीं, कोरोना के कारण नहीं हुई हैं। गांव में साफ सफाई हुई है लेकिन दवा का छिड़काव नहीं हुआ है। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट-

गिरंट बाजार। हिन्दुस्तान संवाद

विकास क्षेत्र जमुनहा के पटपरगंज ग्राम पंचायत के मिर्जापुर गांव में कोरोना का कहर तो नहीं है लेकिन ग्रामीण जागरूक होकर कोरोना गाइडलाइन का पालन पूरी तरह से करते हैं। गांव से बाहर जाने से लोग कतराते हैं। सोमवार को गांव के बाहर बने जूनियर हाईस्कूल में बैठे कुछ लोग बातचीत कर रहे थे। कैमरा देख पहले तो सकपकाए लेकिन आश्वासन देने के बाद लोग संतुष्ट हुए और बातचीत करने को तैयार हुए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पिछले तीन महीने में पांच लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन सभी लोग बुजुर्ग थे और बीमार चल रहे थे। यहां पर अब तक एक दर्जन लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। सभी होम आइसोलेट होकर और दवाईयों का नियमित सेवन करके ठीक हो गए।

हाथ मिलाने से परहेजऔर दूरी बनाए रखते हैं।

ग्रामीण प्रेमपाल ने बताया कि कोरोना से भय हो गया है। इसलिए हमेशा बचने का उपाय करते रहते हैं। लोगों से हाथ नहीं मिलाते हैं और दूर से ही हाथ जोड़ कर नमस्कार कर लेते हैं। इसके साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से परहेज करते हैं। साबुन से हाथ जरूर धोते हैं। इसलिए अभी तक बीमारी से बचे हैं।

गांव में कोरोना की स्थिति गंभीर नहीं

मिर्जापुर गांव में अब तक कोई भी गंभीर नहीं हुआ है। यह बताते हैं शीतल श्रीवास्तव। उन्होंने बताया कि गांव के ज्यादातर लोग खेती बाड़ी करते हैं और जब फुरसत मिलती है तो स्कूल या बाग में बैठ कर समय व्यतीत करते हैं। बाजारों में जाकर किसी दुकान पर लोगों के साथ बैठने से कोरोना का भय बना रहता है। इसलिए दुकानों पर नहीं जाते हैं।

गांव में हुई है सफाई लेकिन दवा का छिड़काव नहीं

राज श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में सफाई करायी गई है। लेकिन दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है। दवा का छिड़काव न होने से बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गांव के लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं। लेकिन कुछ लोग गांव में रहने पर मास्क नहीं लगाते हैं।

लगे कोरोना जांच कैंप तो समाप्त हो भय

पवन कुमार ने बताया कि गांव में कोरोना जांच का कैंप नहीं लगाया गया है। टीकाकरण भी कम लोगों का हुआ है। इसलिए जांच कैंप जरूर लगाना चाहिए। गांव में टीकाकरण के लिए अभी जागरूकता का अभाव है। इसलिए कम लोगों ने टीके लगवाए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि गांव में कैंप लगा कर जागरूक करें।

साहब अस्पताल है दूर, समय से नहीं मिलता इलाज

राजेश कुमार ने बताया कि साहब अस्पताल दूर होने के कारण समय से लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में लोगों को निजी डाक्टरों की शरण लेनी पड़ती है। इससे अधिक पैसे लगते हैं। गांव में कैंप लगा कर दवाओं का वितरण हो तो लोगों के अंदर से कोरोना महामारी का कुछ भय दूर हो जाए।

हिम्मत से कोरोना को हराया

बब्लू गुप्ता ने बताया कि अन्य प्रदेशों से वापस गांव आने वाले लोगों से दूरी बनाए रखते हैं और उन्हें अस्पताल में जाकर कोरोना की जांच कराने के लिए कहा जाता है। इसके साथ ही उन्हें परिवार से कुछ दिन के लिए अलग रहने को प्रेरित किया जाता है। इसके कारण कोरोना महामारी मिर्जापुर गांव में अब तक विकराल रूप नहीं धारण कर सकी है।

कोट

मिर्जापुर गांव में कोरोना के मरीज नहीं हैं। गांव में नियमित तरीके से दवा का वितरण कराया जा रहा है। जिन्हें कोरोना के लक्षण दिखते हैं उन्हें दवाएं दी जाती हैं। सीएचसी आकर जांच कराने की सलाह ग्रामीणों को दी गई है।

डा. रवीन्द्र कुमार अधीक्षक सीएचसी मल्हीपुर

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