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दुकान का शटर महीनों से बंद, पर्दे के पीछे करोड़ों के नशे का कारोबार; जांच में जुटा ड्रग विभाग

दुकान का शटर महीनों से बंद, पर्दे के पीछे करोड़ों के नशे का कारोबार; जांच में जुटा ड्रग विभाग

संक्षेप:

ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दुकान संचालक बिहार का रहने वाला है और लंबे समय से गोरखपुर में नहीं रहता। वह हर महीने दुकान का किराया ऑनलाइन जमा करता है। दस्तावेजों से पता चला कि उसने लखनऊ की एक फर्म से करीब 20 हजार ट्रामाडोल टैबलेट और लगभग चार हजार बोतल कोडीन कफ सिरप खरीदा था।

Nov 23, 2025 11:23 am ISTAjay Singh वरिष्ठ संवाददाता, गोरखपुर
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बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं के सप्लाई की सूचना पर यूपी के गोरखपुर में ड्रग विभाग की टीम ने शनिवार को खोखर टोला इलाके में दवा की एक दुकान पर छापा मारा। इस दौरान दुकान का शटर बंद मिला। पड़ोसियों ने बताया कि यह दुकान लंबे समय से नहीं खुली है। टीम ने दुकान के मालिक से संपर्क किया तो उसने बताया कि संचालक दुकान के किराये का भुगतान ऑनलाइन कर रहा है। इस वजह से दुकान के खुलने या बंद करने की वजह का पता नहीं लगाया। ड्रग विभाग को इस दुकान के लाइसेंस पर भारी मात्रा में नशीली दवाओं के सप्लाई की पुख्ता सूचना मिली थी। हैरानी की बात यह रही कि दुकान पिछले कई महीनों से बंद थी, लेकिन पर्दे के पीछे करोड़ों की नशीली दवाओं की बिक्री जारी है।

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ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि दुकान संचालक बिहार का रहने वाला है और लंबे समय से गोरखपुर में नहीं रहता। वह हर महीने दुकान का किराया ऑनलाइन जमा करता है। जांच में पाया गया कि उसने लखनऊ और दिल्ली से नशीली दवाओं की बड़ी खेप मंगवाई थी। दस्तावेजों से पता चला कि उसने लखनऊ की एक फर्म से करीब 20 हजार ट्रामाडोल टैबलेट और लगभग चार हजार बोतल कोडीन कफ सिरप खरीदा था।

विभाग को शक है कि संचालक इन दवाओं को फुटकर में सप्लाई कर रहा था। आसपास के मेडिकल कारोबारियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि दुकान पिछले कई महीनों से बंद है, फिर भी क्षेत्र में ट्रामाडोल और कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री तेज थी। माना जा रहा है कि यही दवाएं दुकान के संचालकों द्वारा गैरकानूनी तरीके से सप्लाई की जा रही थीं।

मोबाइल कर लिया स्विच ऑफ

लखनऊ में ड्रग विभाग की टीम ने बीते दिनों छापा मारा था। वहीं से पता चला कि लखनऊ स्थित फर्म से दवा की खेप को गोरखपुर की इस फार्मा को सप्लाई किया गया है। ड्रग विभाग की टीम में ड्रग इंस्पेक्टर के अलावा सहायक आयुक्त औषधि पूरनचंद की टीम रही। छापेमारी के दौरान दुकान संचालक का पुराना मोबाइल नंबर बंद मिला, जबकि नया नंबर भी स्विच ऑफ कर दिया था। ड्रग इंस्पेक्टर ने नए और पुराने मोबाइल नंबर और ईमेल पर नोटिस भेजा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। विभाग अब दुकान संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की तैयारी में जुटा है। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि नशीली दवाओं की सप्लाई नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग जुड़े हैं।

बिहार का रहने वाला है संचालक , दर्ज होगा केस

सहायक आयुक्त औषधि पूरनचंद ने बताया कि यह गंभीर मामला है। बंद दुकान से लाखों का नशीली दवाओं का कारोबार हो रहा है। अभी तो सिर्फ एक निर्माता से जानकारी मिली है। और कई सप्लायर ऐसे हो सकते हैं। इसका संचालक बिहार में है। उसका नाम और पता की जानकारी जुटाई गई है। एक नोटिस डाक से भेजी जा रही है। समुचित जवाब नहीं मिला तो दुकानदार के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।

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Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh
अजय कुमार सिंह दो दशक से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और टीवी होते हुए अब डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ीं खबरों को गहराई से कवर किया है। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं। और पढ़ें
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