
24 घंटे में नोटिस वापस लें, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को यूं दिया जवाब
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया है कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और मेलाधिकारी ऋषिराज की ओर से को दिए गए नोटिस का जवाब दे दिया है। जवाब के साथ उन्होंने प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा है। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है।
शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया है कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई है।
बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला और पुलिस प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर पहिया लगी पालकी से संगम स्नान के लिए जाने से रोका था। शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया था, उन्होंने कहा था कि वह अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे, उसी स्थान पर तब तक बैठे रहेंगे जब तक अफसर उनसे मांफी मांग ससम्मान संगम स्नान के लिए नहीं ले जाते हैं। शंकराचार्य के इस ऐलान के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उसने 24 घंटे में स्पष्ट करने को कहा गया था कि वह खुद को शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं और अपने शिविर पर लगे बोर्ड पर शंकराचार्य कैसे लिखा है। इसके बाद मामला और अधिक बढ़ गया। मंगलवार को शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वो अपना जवाब दाखिल करेंगे। बुधवार को जवाब दे दिया। फिलहाल प्रशासन ने इस पर अपना रूख स्पष्ट नहीं किया है। ऐसी चर्चा है कि प्रशासनिक अफसर इस मसले पर विधिक राय ले रहे हैं।
सत्ता हमेशा नहीं रहती, अफसर अहंकार त्यागें : शंकराचार्य सदानंद
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पक्ष में द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सनानंद सरस्वती आ गए हैं। एक वक्तव्य में उन्होंने कहा कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर संत को गंगा स्नान से रोका गया है। बटुकों को चोटी पकड़कर पीटा गया। यह अफसर अहंकार में हैं। वह यह भूल गए हैं कि वो क्या कर रहे हैं। यह सत्ता हमेशा नहीं रहती है। शंकराचार्य ने कहा कि अफसर शिखा का अर्थ ही नहीं जानते। उन्होंने कहा कि जो लोग गंगा स्नान करने वालों को रोकते हैं, उन्हें गो हत्या का पाप लगता है। यह शास्त्र वचन है।
सीएम पर शंकराचार्य की टिप्पणी की इन संतों ने की आलोचना
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ पर गंभीर टिप्पणी की है। जिसकी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी निंदा करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी करना गलत है। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दोष है कि उन्होंने राम मंदिर बनवाया। प्रयागराज की धरती पर माघ मेले का नहीं मिनी कुम्भ मेले का आयोजन हो रहा है। यहां पर शाही स्नान जैसी कोई बात नहीं होती है। करोड़ों की भीड़ को देखते हुए अगर प्रशासन ने रोका तो उसे मानना चाहिए था। इस पर अगर कोई आपत्ति है तो उस पर सरकार से बात करनी चाहिए। आखिर हमें कोई समस्या होती है तो सरकार से बात करते हैं। फिर यहां विरोध क्यों?
उन्होंने शंकराचार्य पर सीधी टिप्पणी करने से यह कह कर इनकार कर दिया। यह पूछे जाने पर कि बटुकों को पीटा गया तो उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यह गलत है लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि इसमें सीएम का कोई कसूर नहीं है। पुलिस की व्यवस्था में लगे चार से पांच अधिकारी थे। जिसकी जांच कराकर कार्रवाई करने के लिए परिषद सीएम को पत्र लिख रहा है। वहीं, इस प्रकरण पर जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने शंकराचार्य को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘गुरुजी आप जानते हैं कि बचपन से मैं आपके साथ रहा हूं। जब भी आपने देश और गंगा की बात की है, मैं हमेशा आपके साथ रहा हूं, लेकिन गोरक्षपीठ के संत के खिलाफ ऐसी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं होगी।’ उन्होंने चेताया कि हमारा संत समाज माला और भाला दोनों की भाषा जानता है।
प्रयागराज की मर्यादा धूमिल हो रही है
इस प्रकरण पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस घटना से प्रयागराज की मर्यादा धूमिल हो रही है। महंत हरिगिरि ने कहा कि जिस दिन की घटना है वो प्रयागराज में नहीं थे। इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है। लेकिन यह घटना नहीं होनी चाहिए थी। दोनों ही पक्षों को यह ध्यान रखना चाहिए कि स्नान बड़ा है। प्रयागराज की मर्यादा बनी रहे।





