बोध दिवस समागम में दिखा भक्ति और आस्था का संगम
Shamli News - झिंझाना में सतलोक आश्रम में संत गरीबदास जी महाराज के तीन दिवसीय बोध दिवस समागम का आयोजन हुआ। पहले दिन भक्ति और सत्संग का कार्यक्रम हुआ, जिसमें संत गरीबदास जी के जीवन और उनके बोध दिवस के महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भंडारे का आनंद लिया।

झिंझाना। सतलोक आश्रम में संत शिरोमणि संत गरीबदास जी महाराज के तीन दिवसीय पावन बोध दिवस समागम का आयोजन किया। जिसमें प्रथम दिन भक्ति, सत्संग और सेवा के वातावरण में शुरू हुआ। इस अवसर पर शामली सहित आसपास के जनपदों एवं विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुँचे और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। गुरुवार को सतलोक आश्रम में संत गरीबदास जी महाराज के बोध दिवस पर चल रहे तीन दिवसीय समागम पर पहले दिन सत्संग में संत गरीबदास जी महाराज के जीवन परिचय तथा बोध दिवस के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि यह दिवस आत्मिक जागृति और सच्ची भक्ति के मार्ग को अपनाने का विशेष अवसर माना जाता है।सत्संग
में बताया गया कि संत गरीबदास जी महाराज भक्तिकाल की निर्गुण भक्ति परंपरा के महान संत थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब वे मात्र 10 वर्ष की आयु में गौएँ चराने गए थे, तब उन्हें परमेश्वर कबीर साहेब जी का साक्षात्कार हुआ। कबीर साहेब जी ने उन्हें नामदीक्षा प्रदान कर दिव्य लोकों सहित सतलोक के दर्शन करवाए और सच्ची भक्ति का ज्ञान दिया। इसके पश्चात उन्होंने अपनी वाणियों के माध्यम से मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य और सतभक्ति का संदेश समाज तक पहुँचाया।आश्रम परिसर में भव्य आध्यात्मिक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें संत गरीबदास जी महाराज और कबीर साहेब जी के दिव्य मिलन, नामदीक्षा की घटना तथा सतलोक दर्शन को चित्रों और मॉडलों के माध्यम से दर्शाया गया। प्रदर्शनी में सृष्टि रचना, शास्त्रसम्मत भक्ति और मानव जीवन के उद्देश्य से जुड़ी जानकारियाँ सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत की गईं। जिसके बाद विशाल भंडारे में साथ ही विशाल भंडारे हजारों श्रद्धालुओं ने देशी घी से बने लड्डू, जलेबी व हलवा, पूड़ी, सब्ज़ी, रायता सहित शुद्ध एवं सात्विक भोजन प्रसाद रूप में ग्रहण किया।यह कार्यक्रम जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम दिवस का समापन सायंकालीन सत्संग और भक्ति कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने मानव कल्याण, सद्भाव और सतभक्ति का संकल्प लिया।
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