
आरटीई के तहत इस बार दाखिला लेने वाले बच्चों का होगा दोहरा सत्यापन
संक्षेप: Shamli News - भारत में निजी स्कूलों में कमजोर और अलाभित समूह के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाने के लिए आरटीई कानून के नियमों को सख्त किया गया है। अब प्रमाणपत्रों की दोहरी जांच होगी और आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों की गलतियों पर कार्रवाई होगी और बिना कारण प्रवेश न देने पर स्कूलों की मान्यता रद हो सकती है।
निजी स्कूलों में दुर्बल, अलाभित समूह व एक लाख रुपये वार्षिक आय वाले परिवार के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाने के लिए लागू शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के नियम अब और सख्त किए गए हैं। अपात्रों को लाभ लेने से रोकने के लिए अब शिक्षा विभाग के साथ ही दाखिल प्रमाणपत्रों की जांच संबंधित विभाग भी करेंगे। दोहरे सत्यापन के साथ ही बच्चे और अभिभावक का आधार कार्ड भी अनिवार्य किया गया है। विद्यालयों द्वारा पात्रों को प्रवेश देने से मनाही पर उनकी मान्यता छीने जाने तक का प्रविधान है। इस बार शासन द्वारा आरटीई यानि शिक्षा का अधिकार कानून के नियम के तहत निजी स्कूलों में दुर्बल वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए सख्ती बरतते हुए अभियार्थियों के प्रमाण पत्रों की दोहरी जांच की जाएगी।

अब से पहले आरटीई में लाभ लेने वाले अभ्यार्थियों की जांच खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा की जाती थी। वहीं, इस बार खण्ड शिक्षा अधिकारियों के अलावा पोर्टल पर भी आनलाईन पात्रों की जांच की जाएगी। यह बदलाव इसलिए किए है कि निजी स्कूलों में प्रवेश न मिलने की शिकायतें मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी लगातार उठती रहीं हैं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर में कुछ बच्चियों का निजी स्कूल में प्रवेश मिल पाया। इसी अनुभव के बाद ये बदलाव किए हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार की यह पहल शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार द्वारा मंगलवार को जारी शासनादेश के मुताबिक, आरटीई के आवेदनों का आनलाइन पोर्टल के माध्यम से दो स्तर पर सत्यापन किया जाएगा। अभी तक सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी करते थे। अब इसमें एक समिति बनाकर अन्य विभागीय जांच भी शामिल किया गया है। जिसकी अध्यक्षता डीएम करेंगे। प्रवेश संबंधी विवादों के निस्तारण के लिए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। आरटीई में जो प्रमाणपत्र लगाए गए हैं, उन्हें स्कूल भी आनलाइन पोर्टल पर देख सकेंगे। संबंधित विभाग ने प्रमाणपत्रों को अस्वीकार किया तो आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन होगी। फर्जी दस्तावेज (आय, जाति आदि प्रमाणपत्र) के आधार पर दाखिला कराने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गलत सत्यापन करने वाले संबंधित अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध भी कार्रवाई होगी। वहीं, जिन निजी स्कूलों में पूर्व प्राथमिक शिक्षा दी जाती है, वहां 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत आरक्षित होंगी। प्रवेश का वार्षिक लक्ष्य, जिले में सभी निजी विद्यालयों की न्यूनतम प्री-प्राइमरी या कक्षा एक की सीटों के योग का 25 प्रतिशत होगा। स्कूलों को अपनी खाली सीटों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। पहले की तरह सभी चयनित बच्चों की सूची सार्वजनिक की जाएगी। अभिभावकों को किताब और ड्रेस खरीदने के लिए हर साल पांच हजार रुपये सीधे बैंक खाते में मिलेंगे। स्कूल द्वारा आवंटित बच्चे को बिना कारण प्रवेश न देने पर उसकी मान्यता रद हो सकती है। प्रवेश मिलने के बाद स्कूल को बच्चे की जानकारी आरटीई पोर्टल और यू-डायस पोर्टल पर दर्ज कर अपार आइडी बनानी होगी, तभी स्कूल को शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा। जिला स्तरीय अधिकारी, सभी प्रतिपूर्ति बिल और मांग पत्र का सत्यापन करेंगे। खंड शिक्षा अधिकारी हर तिमाही स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण कर बच्चों की उपस्थिति जांचेंगे। आरटीई के तहत ये कब और कैसे कर सकेंगे आवेदन इस बार भी दिसम्बर माह से ही आरटीई के आवेदन आनलाई शूरू किए जाएगें। जिसके लिए अभियार्थी के परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये होनी चाहिए। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछडा वर्ग, अनाथ, निराश्रित, एचआइवी/एड्स व कैसर पीडित अभिभावकों के बच्चे। दिव्यागजन परिवार। आवेदन केवल www.rte25.upsdc. gov.in पोर्टल पर होंगे।

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