अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग से बंजर हो रही धरती की कोख
Shamli News - किसानों द्वारा रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति को खत्म कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो धरती बंजर हो जाएगी। मिट्टी में पोषक तत्वों...

अंधाधुंध रसायन के प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म होती जा रही है। रसायनिक खाद हो या कीटनाशक अधिक उत्पादकता के चक्कर में किसान इनका अधिक प्रयोग कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मनना है कि यही हाल रहा तो एक दिन धरती की कोख बंजर हो जायेगी। एक साल में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट बता रही है कि जिले की मिट्टी में जीवांश कार्बन फास्फेट न्यूनतम स्थिति में पहुंच चुका है। सल्फर की मात्रा बहुत कम पाई गई है। जिले में किसानो द्वारा कृषि भूमि में अधिक पैदावार के लालच में किसान अपने खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग कर रहें है। पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 16 पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। इसमें मुख्य रूप से कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्सिशयम, मैग्नीशियम, मैग्नीज, तांबा, लौह व क्लोरीन शामिल हैं। जिले में पांच हजार मिट्टी के नमूने लेने का लक्ष्य रखा गया था। उपकृषि निदेशक प्रमोद कुमार के मुताबकि विभाग द्वारा पांच हजार किसानों की मिट़टी के नमूने लिए गए। जिले के पांचों ब्लॉक के दर्जनों गांवों का चयन किया गया था। मिट्टी की जांच में चौंकाने वाले परिणाम आए हैं। मिट्टी के इन नमूनों में सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन व फॉस्फोरस की कमी पाई गई है। वही किसानों को मिट्टी जांच का रिर्पोट कार्ड भी दिया गया है। साथ ही कसानों को बताया गया है कि किस तरह मिट्ठी में कम हुए पोषक तत्वों की पूर्ति कैसे की जा सकती है। इसके अलावा जीवांश कार्बन फास्टफेट की न्यूनतम कमी पाई है।
मात्र एक लैब के सहारे है जिले के 1.36 लाख किसान
जिले में करीब एक लाख 36 हजार किसान पंजिकृत है। जो मात्र एक मृदा परिक्षण लैब के भरोसे है। जबकि जिले में पंजिकृत किसानों की संख्या को देखते हुए कम से कम दो मृदा परिक्षण लैब होनी चाहिए। क्योंकि जिले में कोई भी प्राईवेट मृदा परिक्षण लैब नही है।
117 रूपये में कोई भी किसान करा सकता है अपने खेत की उर्वरकता की जांच
यदि किसी किसान को अपनी कृषि भूमि की मिट्टी के पोषक तत्वों की जांच करानी है तो 117 रूपये की सरकारी फीस जमा कर कैराना में बनी मृदा परिक्षण लैब में जांच करा सकते है। जिसके बाद किसान रिर्पोट के आधार पर अपनी कृषि भूमि को अधिक उपजाऊ बना अच्छी पैदावार ले सकते है।
पांच हजार किसानों के खेत की मिट्टी की हुई जांच
कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में पोषक तत्वों की लगातार कमी होती जा रही है। हालांकि कृषि विभाग हर साल पोषक तत्वों की कमी की समस्या के समाधान के लिए लगातार किसानों को खेतों पर खरपतवार नहीं जलाने और रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का प्रयोग के लिए जागरूक कर रहा है। कृषि विभाग की ओर से 2024-25 के लिए जिले के 5000 किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की गई है।
कोट -
शासन से विभाग को जिलेभर से पांच हजार स्थानों से मिट्टी के नमूने लेकर मिट्टी की उर्वरक शक्ति व पोषक तत्वों की जांच करने का लक्ष्य दिया गया था। जो विभाग द्वारा पूरा कर लिया गया है। वही किसानों को जागरूक करते हुए खेतों पर खरपतवार नहीं जलाने और रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है।
उपनिदेशक कृषि - प्रमोद कुमार
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