रोजाना सुबह चार बजे उठकर दौड़ना बन गया निपम की दिनचर्या

Newswrap हिन्दुस्तान, शामली
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Shamli News - निपम ने हांगकांग में आयोजित अंडर-20 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर गांव पावटी कला का नाम रोशन किया। वह सुबह चार बजे प्रैक्टिस करती हैं और राष्ट्रीय चार गुना 100 मीटर रिले टीम की सदस्य हैं। आगामी एक जून को वह अपने गांव लौटेंगी, जहां उनका भव्य स्वागत होगा।

रोजाना सुबह चार बजे उठकर दौड़ना बन गया निपम की दिनचर्या

कैराना। हांगकांग में आयोजित अंडर-20 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर गांव पावटी कला का नाम विश्वभर में रोशन करने वाली निपम ने सफलता यूं ही अर्जित नहीं की। यह उसकी कड़ी मेहनत और जज्बा है। घर हो या स्टेडियम वह सुबह चार बजे प्रैक्टिस में लग जाती। यह उसकी दिनचर्या में शामिल है। निपम राष्ट्रीय टीम चार गुना 100 मीटर रिले टीम की सदस्य भी हैं। गांव पावटीकलां के किसान शिवकुमार की बेटी निपम बचपन से ही खेलों के प्रति गंभीर रही। पिता शिवकुमार बताते हैं कि स्थानीय प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीतने के बाद उन्हें एहसास हो गया था कि बेटी में कुछ अलग करने का जज्बा है। गांव में दौड़ के लिए ट्रैक या मैदान नहीं था, इसके बावजूद निपम रोजाना सुबह चार बजे उठकर अभ्यास के लिए जाती थी। पिता ने उसे प्रैक्टिस के लिए मुजफ्फरनगर भेज दिया। 20 बीघा जमीन में परिवार का लालन पालन भी और बेटी की प्रैक्टिस के लिए शिव कुमार ने फैक्ट्री में भी काम किया। मां गीता देवी बताती हैं कि निपम घर और खेत के काम में भी पूरा हाथ बंटाती थी。

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भी जीते पदक

निपम ने गांव के देवभूमि पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा सदन इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। मुजफ्फरनगर में शुभम बालियान के मार्गदर्शन में उसने अभ्यास शुरू किया। अब तक वह राष्ट्रीय स्तर पर चार, राज्य स्तर पर छह से सात तथा जिला स्तर पर दर्जनों पदक जीत चुकी हैं। उनके घर में आज भी मेडल की लंबी कतार सजी हुई है।

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मेडल न मिलने पर रो पड़ती थी निपम

मां गीता देवी बताती हैं कि शुरुआत में जब किसी प्रतियोगिता में मेडल नहीं मिलता था तो निपम रो पड़ती थी। परिवार उसे समझाता और हौसला बढ़ाता था। इसी हिम्मत ने आज उसे एशियाई मंच तक पहुंचा दिया।

एक जून को गांव पहुंचेगी निपम

एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद निपम चौहान आगामी एक जून को अपने गांव पावटीकलां पहुंचेगी। इसे लेकर गांव और परिवार में उत्साह का माहौल है। ग्रामीण और परिजन बेटी के भव्य स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं।

भव्य स्वागत की तैयारी

शामली एथलेटिक्स सचिव जबर सिंह खैवाल ने बताया कि निपम चौहान ने हांगकांग में आयोजित अंडर-20 जूनियर एशियन गेम्स चैंपियनशिप की 100 मीटर दौड़ 11.62 सेकंड में पूरी कर कांस्य पदक जीतते हुए भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। जबर सिंह ने बताया कि निपम के भारत लौटने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। शामली में बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत यात्रा निकाली जाएगी। स्वागत यात्रा शामली से टिटौली, सेवापुर, लपराना, टपराना, झिंझाना, गाड़ी वाले सहित विभिन्न गांवों से होती हुई उनके गांव पावटी कलां तक पहुंचेगी।

सामान्य प्रश्न

निपम ने कांस्य पदक किस प्रतियोगिता में जीता?
निपम ने हांगकांग में आयोजित अंडर-20 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।

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