बीमा क्लेम निरस्त करने पर इंश्योरेंस कंपनी को 5.50 लाख का जुर्माना

Newswrap हिन्दुस्तान, शामली
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Shamli News - शामली में एक बीमा कंपनी ने कोविड-19 के दौरान इलाज के लिए किए गए दावे को निरस्त कर दिया, जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कंपनी को 5,25,942 रुपये और 25,000 रुपये का अर्थदंड भरने का आदेश दिया। बीमाधारक ने 2015 में पॉलिसी ली थी, लेकिन क्लेम खारिज कर दिया गया।

बीमा क्लेम निरस्त करने पर इंश्योरेंस कंपनी को 5.50 लाख का जुर्माना

शामली। कोविड-19 के दौरान उपचार कराने के बावजूद मेडिकल क्लेम निरस्त करना निजी बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले में फैसला सुनाते हुए एसएचएआई कंपनी की शामली शाखा को बीमाधारक को 5,25,942 रुपये भुगतान करने के आदेश दिए हैं। साथ ही अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। क्षेत्र के गांव टिटौली निवासी राजकुमार वर्मा व उनकी पत्नी सविता वर्मा ने बीमा कंपनी के खिलाफ वाद दायर किया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने भविष्य में चिकित्सा खर्च वहन करने का आश्वासन देकर उनसे वर्ष 2015 में फैमिली हेल्थ ऑप्टिमा पॉलिसी जारी की थी, जिसमें 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर दिया गया था।

परिवादियों के अनुसार वर्ष 2020-21 की पॉलिसी अवधि में बोनस के साथ कुल 7,85,000 रुपये का रिस्क कवर तथा 1,50,000 रुपये का अतिरिक्त रिचार्ज बेनिफिट दिया गया था। कोविड की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल 2021 में दोनों की तबीयत बिगड़ने पर पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कोविड पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें आईवीएम हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर रेफर किया गया। वहां 14 अप्रैल से 18 अप्रैल 2021 तक उनका उपचार चला। बीमाधारकों ने अस्पताल में भर्ती होने की सूचना समय रहते कंपनी को ईमेल के माध्यम से दे दी थी, लेकिन कंपनी ने 11 जून 2021 को मेडिकल रिकॉर्ड में विसंगति और तथ्यों के मिथ्या निरूपण का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता व सदस्या अमरजीत कौर ने परिवाद स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि इलाज में हुए 5,25,942 रुपये का भुगतान 15 अप्रैल 2021 से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए। साथ ही कंपनी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाते हुए उक्त राशि राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए गए।

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