
ठंड ने दी दस्तक, रैन बसेरों और कंबल वितरण में उदासीनता बरकरार
Shamli News - जनपद में ठंड बढ़ने के साथ रैन बसेरों में मूलभूत सुविधाओं की कमी से बेघर लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं। नगर निकायों और प्रशासन की लापरवाही के चलते गरीब लोग 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान में खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से रैन बसेरों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।
जनपद में बढ़ती ठंड ने दस्तक दे दी है, लेकिन रैन बसेरों में अभी तक मूलभूत इंतज़ाम न होने से खुले में रात गुजारने वालों की परेशानी बढ़ गई है। नगर निकायों की लापरवाही के चलते बेघर और जरूरतमंद लोग ठिठुरन में मजबूरन खुले आसमान के नीचे रातें बिताने को विवश हैं। नवंबर माह शुरू होने के साथ ही ठंड ने अपनी दस्तक दे दी थी। अब नवंबर माह समाप्ति की ओर है, लेकिन जिलेभर की नगर निकायों में अभी तक रैन बसेरों की व्यावस्था नही की गई। नगर निकाय ही नहीं, प्रशासन भी अभी तक सक्रिय नजर नहीं आ रहा।
ठंड बढ़ जाने के बावजूद रैन बसेरों को व्यवस्थित करने या अस्थाई रैन बसेरे स्थापित करने को लेकर कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए। इसके साथ ही तहसील, ब्लॉक और नगर निकाय स्तर पर कंबल वितरण अभियान भी शुरू नहीं हो सका, जबकि हर साल नवंबर के अंतिम सप्ताह तक जरूरतमंदों को कंबल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इस बार देरी के कारण गरीब और असहाय लोग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। शामली नगर पालिका में पिछले साल रैल बसेरे के लिए 20 बैड की व्यावस्था की गई थी, लेकिन जिला प्रशासन की कोई गाईडलाईन न आने से नगर पालिका में रैन बसेरे की कोई सुविधा नही है। इसके अलावा शामली रेलवे स्टेशन और रोडवंेज बस स्टेंड पर भी रैन बसेरे की कोई सुविधा नही है। जिस कारण बेघर लोग सडक पर ही रात्रि के 8 डिग्री सैल्सियस के तापमान में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और निकायों को तुरंत हरकत में आकर रैन बसेरों में रोशनी, बिस्तर, पानी और सुरक्षा जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि ठंड से राहत मिल सके।

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