आत्मचिंतन, प्रेम और संस्कारों से बनता है सुखी परिवार- विनिश्चय सागर
शामली में आयोजित धर्मसभा में आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने आत्मचिंतन, प्रेम और संस्कार को सुखी परिवार की नींव बताया। उन्होंने कहा कि भौतिक साधनों की तलाश में भटकने के बजाय आत्मज्ञान और आत्मचिंतन से स्थायी शांति प्राप्त होती है। परिवार की खुशहाली प्रेम, विश्वास और सहयोग से बनी रहती है।

शामली। शहर के जैन धर्मशाला में अपने प्रवास के अंतिम दिन आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि आत्मचिंतन, प्रेम और संस्कार ही सुखी एवं समृद्ध परिवार की वास्तविक नींव हैं। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश लोग सुख, शांति और सुकून की तलाश में भौतिक साधनों एवं बाहरी संसाधनों की ओर दौड़ रहे हैं, जबकि वास्तविक और स्थायी शांति आत्मज्ञान, आत्मचिंतन तथा सही समझ से प्राप्त होती है। उन्होने कहा कि तीर्थ यात्रा, पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां मन को प्रसन्नता अवश्य प्रदान करती हैं, लेकिन जब तक व्यक्ति स्वयं को पहचानने और अपने भीतर झांकने का प्रयास नहीं करता, तब तक उसे जीवन के वास्तविक आनंद की अनुभूति नहीं हो सकती। आत्मचिंतन ही व्यक्ति को सच्चे सुख और संतोष की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि परिवार मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। परिवार की खुशहाली केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और सहयोग से बनी रहती है। यदि आर्थिक समृद्धि बढ़ती जाए और संस्कार तथा आपसी प्रेम कम होते जाएं, तो परिवार बिखरने लगता है। इसलिए जीवन में त्याग, समझदारी और अच्छे संस्कारों को विशेष स्थान देना आवश्यक है।
परिवार के महत्व
कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर अपने व्यवहार, वाणी और संबंधों का मूल्यांकन करना चाहिए। मधुर वाणी और विनम्र व्यवहार लोगों के दिल जीत लेते हैं, जबकि कटु शब्द रिश्तों में दूरियां पैदा कर देते हैं। परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखने के लिए एक-दूसरे की अच्छाइयों की सराहना करना आवश्यक है।
धर्मसभा में जैन समाज
31एसएमएल15-शामली के जैन धर्मशाला में धर्मसभा में उपस्थित जैन समाज के लोग।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


