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शाहजहांपुर

नगला इब्राहिम गांव में लगाए गए कैमरे में रिकार्ड हुई बाघिन

हिन्दुस्तान टीम,शाहजहांपुरPublished By: Newswrap
Wed, 20 Jan 2021 11:36 PM
नगला इब्राहिम गांव में बाघिन के साथ शावक होने की प्रबल संभावना है। गन्ने के खेत में फिक्स एक कैमरे ने बाघिन को रिकार्ड किया...
1 / 3नगला इब्राहिम गांव में बाघिन के साथ शावक होने की प्रबल संभावना है। गन्ने के खेत में फिक्स एक कैमरे ने बाघिन को रिकार्ड किया...
नगला इब्राहिम गांव में बाघिन के साथ शावक होने की प्रबल संभावना है। गन्ने के खेत में फिक्स एक कैमरे ने बाघिन को रिकार्ड किया...
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नगला इब्राहिम गांव में बाघिन के साथ शावक होने की प्रबल संभावना है। गन्ने के खेत में फिक्स एक कैमरे ने बाघिन को रिकार्ड किया...
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नगला इब्राहिम गांव में बाघिन के साथ शावक होने की प्रबल संभावना है। गन्ने के खेत में फिक्स एक कैमरे ने बाघिन को रिकार्ड किया है। मंगलवार रात ग्रामीणों ने भी तालाब से पानी पीकर लौटती बाघिन देखी है।

नगला इब्राहिम और नगला मधा के ग्रामीणों का मानना है कि बाघिन दो सप्ताह से गन्ने के खेतों में डेरा जमाए है। सौ बीघा से अधिक रकबे में फैली गन्ने की फसल में बाघ होने की चर्चा एक सप्ताह से फैली तो वन विभाग सक्रिय हुआ। पगचिन्ह मिलने पर अधिकारियों ने टीम तैनात कर निगरानी शुरू की, जगह जगह चार दिन पहले जंगल में कैमरे भी लगाए गये। गन्ने के खेत में फिक्स एक कैमरे ने बाघिन को रिकार्ड किया है।

बाघिन हष्टपुष्ट है। बाघिन के साथ नन्हें शावकों की संभावना है। गन्ने की फसल में लंबे समय तक एक ही जगह बाघिन के डेरा जमाने की वजह वन कर्मी मान रहे हैं।

वनकर्मी गर्भवती बाघिन के यहां आकर बच्चे देने की संभावना से भी इंकार नहीं कर रहे। दरअसल बच्चे देने से पहले बाघिन नर बाघ से बच्चों की सुरक्षा को प्रसव के लिए दूर सुरक्षित स्थान पर चली जाती है। नगला इब्राहिम में सैकड़ों बीघा तक फैली गन्ने की फसल, प्रचुर शिकार के लिए बहुतायत में जंगली जीव और पानी के लिए पास ही तालाब का होना बाघिन और बच्चों के रहने का उपयुक्त स्थान है। वन कर्मी मान रहे हैं कि बाघिन शावकों के दौड़ने तक इसी स्थान पर टिकी रहेगी।

नगला इब्राहिम के श्री निवास तालाब की दिशा में स्थित बग्घर में देर शाम बैलों को देखने आये तो बाघ को तालाब से पानी पीकर गन्ने की तरफ लौटते देखा। कई ग्रामीणों ने बताया कि गन्ने के खेत से शावकों की आवाजें आती हैं। उसके बाद तालाब की तरफ से बाघिन भी काफी देर तक दहाड़ती है। गन्ने की फसल से तालाब करीब एक फर्लांग दूर सड़क के दूसरी तरफ है।

मंगलवार शाम पड़ोसी गांव परमानंदपुर नदी किनारे की तरफ भी बैलगाड़ी लेकर आ रहे किसानों ने भी बाघिन देखने की जानकारी दी। इससे अनुमान है कि बाघिन अंधेरा होने के बाद शिकार के लिए आसपास के एक दो किमी क्षेत्र तक भ्रमण करती है।

शाम होते ही बंद हो जाता है आवागमन

=बाघिन देखे जाने के बाद नगला इब्राहिम और नगला मधा संपर्क मार्ग पर शाम से ही ग्रामीण आवागमन बंद कर देते हैं। नगला इब्राहिम और नगला मधा के पड़ोसी गांव हत्सा, परमानंदपुर, अलियापुर, कपूरापुर में शाम होते ही बाघिन की दहशत से सन्नाटा पसर जाता है। सहमे ग्रामीण घरों के अंदर दुबक रहते हैं। दिन में ग्रामीण फसलों की सिंचाई भी नहीं कर पा रहे।

बाघिन के भय से छुट्टा गोवंशीय पशु और नीलगाय इलाके में नहीं फटक रहे। फसलों का नुकसान न होने से किसानों को राहत है। गन्ने में बाघिन का डेरा होने की पुष्टि होने के बाद वन कर्मियों ने ग्रामीणों को सतर्कता बरतने, गन्ने के खेतों से दूर रहने और शाम को घरों में रहने की सख्त हिदायत दी है। बेहद जरूरी होने पर वन कर्मियों को साथ लेकर ही गन्ने की फसल की दिशा में जाने के हिदायत दी गयी है।

जरूरत पर पिंजड़ा लगाया जाएगा

=वन विभाग के अधिकारी फिलहाल बाघिन की निगरानी पर ही फोकस कर रहे हैं। बाघिन द्वारा किसी तरह का नुकसान न पहुंचाने से वन कर्मी निश्चिंत हैं। वन अधिकारी शावकों की मौजूदगी की पुष्टि करने के बाद बाघिन को पकड़ने की रणनीति बनाएंगे। डीएफओ आदर्श कुमार बुधवार को फिर नगला इब्राहिम पहुंचे। गन्ने और गेहूं के खेतों समेत तालाब में मिले पगचिन्हों का भ्रमण कर निरीक्षण किया। कैमरे में रिकार्ड बाघिन को देखा। ग्रामीणों से जानकारी लेकर सतर्कता बरतने की जरूरी हिदायत दी। डीएफओ ने बताया बाघिन के साथ शावक हो सकते हैं। नन्हें शावकों के मजबूत होने तक बाघिन जगह नहीं बदलेगी।

अफवाहों से वन कर्मी परेशान

=नगला इब्राहिम के आसपास पांच-छह किमी की परिधि में स्थित गांव के लोग दहशतजदा हैं। ग्रामीण दूसरे जंगली जानवरों को भी बाघिन समझकर हल्ला मचा रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारी खबर मिलने पर दौड़ते हैं। जांच पड़ताल में पगचिन्ह सियार, जंगली बिलाव निकलते हैं। वन कर्मियों के मुताबिक गांव अलियापुर, कपूरापुर, पिपरी, हतसा, खैरपुर, फीलनगर आदि से बाघ की सूचनाएं आने पर जांच पड़ताल की। पगचिन्ह दूसरे जंगली जानवरों के निकले। ग्रामीणों को दूसरे जंगली जानवरों देखकर बाघ का भ्रम होता है।

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