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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेश शाहजहांपुरबाढ़ में बह गए किसानों के सपने, मुश्किलों ने और जकड़ा

बाढ़ में बह गए किसानों के सपने, मुश्किलों ने और जकड़ा

हिन्दुस्तान टीम,शाहजहांपुरNewswrap
Thu, 28 Oct 2021 03:12 AM
नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं...
1/ 3नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं...
नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं...
2/ 3नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं...
नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं...
3/ 3नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं...

नदियां शांत हो गईं। सैलाब गुजर गया। लोग बचे हैं। उनके साथ मुश्किलें खड़ी हैं। यह ऐसी मुश्किलें हैं जो बाढ़ पीड़ितों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है। फसलें तबाह हो गई हैं। बेटी की शादी के सपने बिखरे हुए हैं। बच्चों की पढ़ाई चौपट है। सड़कों पर कीचड़ जमा है और दूर जाती नदी तबाही के निशान छोड़ रही है। जिंदगी है, पेट की भूख है, अनिश्चतता है, बेहाली है, बर्बादी है। इसी के साथ ग्रामीणों को फिर से सपने देखने हैं, फसलें फिर से बोनी हैं, जिंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाना है। फसल बची नहीं है, खेत मुंह चिढ़ा रहे हैं, बैंक वाले कर्ज वापसी को आ रहे हैं। साहूकारों की बाछें खिली हैं। किसी का खेत बिकेगा, किसी के जेवर तब पेट भरेगा।शाहजहांपुर जिले में गंगा, रामगंगा, बहगुल, गर्रा, देवहा, खन्नौत नदियों में आई बाढ़ के बाद अब बर्बादी का आलम देखते नहीं बनता है। गांवों का हाल बेहाल है। ग्रामीणों को इस बाढ़ ने अनगिनत दर्द दिए हैं, जो फिलहाल जल्दी खत्म नहीं होने वाले हैं। मदद कहीं से मिलती नहीं दिख रही है। कलान, मिर्जापुर, जैतीपुर ब्लाक क्षेत्र में रामगंगा नदी में पानी घटने के बाद भी लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं। लोग आर्थिक सहायता के इंतजार में हैं। अभी तक किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं हुई है। परौर इलाके में कई दिन से रामगंगा का जल स्तर बढ़ने से तबाही मची हुई थी। सैंकड़ों हेक्टेयर लहलहाती फसल बाढ़ में समा गई। रामगंगा किनारें कई गांव में पानी पहुंच गया था। सोमवार से पानी घटना शुरू हुआ है। जल स्तर घटने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई। मोहनपुर, हैदलपुर, मंझा, दहिलिया, बोझी, अमृतापुर, सोहण, घावरा, चचुआपुर आदि गांव के लोग नुकसान से आहत है। किसानों का कहना है कि सरकार से मुआवजा नहीं मिला तो निश्चित ही दूसरे शहरों में पलायन करना पड़ेगा।

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