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25 सितम्बर, 2020|11:11|IST

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जरा सी उम्र में कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियों का बोझ

जरा सी उम्र में कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियों का बोझ

लाकडाउन कहें या फिर मजबूर करने वाला वक्त। जब सब कुछ बंद है, तब कई ऐसे परिवार हैं, जिनके बच्चों को रोजी रोटी की फिक्र करनी पड़ रही हैं। उम्र तो स्कूल जाने की है, शैतानियां करने की हैं पर जीवन कब कौन सा मोड़ ले ले, कुछ कहा नहीं जा सकता है। दूसरा महीना चल रहा है, घरों में फाकाकशी की नौबत है। ऐसे में उन्हीं बच्चों को सब्जी और चाय बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। शुक्रवार को सब्जी का ठेला लेकर जाते दो भाइयों की तस्वीर सामने आई। दोनों भाइयों के पास केवल दो घंटे का ही वक्त था सब्जी बेचने के लिए, इसलिए उनके कदम मेन रोड से एक गली की ओर तेजी से बढ़ते जा रहे थे। दो घंटे के बाद उन्हें घर जाना था। यही कोई दो से तीन सौ रुपए की उनकी बचत हो जाती है, तब पूरी सब्जी बिक जाती है। पर दो घंटे में सब बेच पाना आसान नहीं है। यह बालक अपने पांच लोगों के परिवार का पेट भरते हैं। केरूगंज में एक बालक दुकानों पर, आफिसों में केतली में चाय लेकर जाता है। मासूम बालक ने अभी लाकडाउन के दौरान ही अपने माता-पिता का हाथ बंटाना शुरू किया है। घर में चाय बनती है, बालक उसे केतली में भरता है। आफिस और दुकानों पर जाकर पूछता है कि क्या चाय पिएंगे। बालक इतना मासूम है कि उसे कोई न नहीं कहता है। उसके पिता ही पहले काम करते थे, लेकिन लाकडाउन में काम छूट गया। परिवार का खर्च नहीं चल रहा था, तब बालक ने ही अपने पिता से चाय बेचने का काम शुरू करने को कहा। अब इस बालक की शाम तक सौ से डेढ़ सौ चाय बिक जाती हैं, उसी से परिवार का पेट पल रहा है।

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  • Web Title:The burden of big responsibilities on the shoulders at a young age