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स्वामी लक्ष्मणानंद ने सनातन धर्म व संस्कृति के दिया बलिदान

स्वामी लक्ष्मणानंद ने सनातन धर्म व संस्कृति के दिया बलिदान

धर्म जागरण समन्वय की ओर से स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के बलिदान दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें संत को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस दौरान संत के बलिदान को याद किया गया। विसरात रोड स्थित परशुराम धाम पर कार्यक्रम में आरएसएस के जिला संघ चालक कमलेश द्विवेदी ने कहा कि देश सैकड़ों सालों तक परतंत्र रहा। गुलामी काल में विदेशियों ने सनातम धर्म व भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने का कुत्सित प्रयास किया। लेकिन संतों, मनीषियों ने प्राणों का बलिदान देकर उसकी रक्षा की है। संघ के विभाग बौद्धिक प्रमुख वीरेंद्र मिश्रा ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद का जन्म उड़ीसा प्रांत के कंधमाल में साल 1924 को हुआ था। उन्होंने कई सालों तक हिमालय के कंदराओं में तपस्या की और 1965 में उड़ीसा लौटे। उन दिनों आदिवासी, वनवासी क्षेत्रों में चर्च का प्रभाव व मतांतरण को देखकर उनका मन विचलित हो उठा। तब उन्होंने आदिवासियों, वनवासियों के बीच काम करते हुए कन्या विद्यालय, छात्रावास, चिकित्सा आदि का प्रबंध किया। उनके प्रयासों से हजारों लोग दोबारा हिन्दू धर्म में वापस आए। ईसाई मिशनरियों का काम बंद होने से बौखलाए लोगों ने 23 अगस्त 2008 को कृष्ण जन्माष्टमी पर स्वामी धर्मानंद की हत्या करा दी। उन्होंने कहा कि स्वामी के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस मौके पर विभाग संयोजक शिव शर्मा, अश्वनी अवस्थी, जितेंद्र तिवारी, लवकुश मिश्रा, राजेश शर्मा, संतोष सिंह, आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Swami Laxmanananda sacrificed sacrifices of Sanatan religion and culture