Suresh Khanna s victory over Sagar s win - सागर की जीत को सुरेश खन्ना ने लगाया एड़ी चोटी का जोर DA Image
17 नबम्बर, 2019|3:47|IST

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सागर की जीत को सुरेश खन्ना ने लगाया एड़ी चोटी का जोर

सागर की जीत को सुरेश खन्ना ने लगाया एड़ी चोटी का जोर

इस बेमिसाल जीत के असल हकदार तो कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना हैं। अरुण सागर तो बस प्रत्याशी के रूप में सबके सामने थे, पर असली परीक्षा तो सुरेश कुमार खन्ना ने दी, जिसमें उन्हें 100 में 100 नंबर भी मिले। यह परीक्षा भी कोई साधारण नहीं थी।

सुरेश खन्ना के सामने कदम-कदम पर चुनौतियां थीं, जिसे वह स्वीकार करते रहे और राजनीति की चौसर बिछाते रहे। शह मात का खेल विपक्षियों से कम रहा, अपनों से ज्यादा रहा। पर हर चाल में खन्ना मात देते चले गए।पल-पल बदले समीकरणलोकसभा सीट पर अरुण सागर को जीत मिलने की बात तो बाद में करेंगे।

पहले कृष्णाराज के टिकट कटने पर चर्चा कर लेते हैं। कई लोग थे टिकट की लाइन में। उसमें अरुण सागर का नाम बहुत चर्चा में नहीं रखा गया, जबकि तय पहले से ही था कि अगर टिकट कटेगा तो मिलेगा अरुण सागर को ही। केंद्रीय मंत्री कृष्णाराज हर उस व्यक्ति का पत्ता काट रही थीं, जिसे टिकट मिल सकता था। पर इस बात का अंदाजा उन्हें शायद नहीं था कि ऐन वक्त पर अरुण सागर का नाम आगे आ जाएगा। वह पूरी तरह से मुतमईन थीं कि उनका टिकट अब नहीं कटेगा।

कट भी नहीं रहा था। 21 मार्च की दोपहर तक सबकुछ ठीक था। पर एक वीटो पॉवर का इस्तेमाल हुआ, 21 मार्च की शाम को अरुण सागर को प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा जेपी नड्डा ने टीवी पर कर दी। शाहजहांपुर में हड़कंप मच गया था। यह पहली जीत थी कृष्णाराज के विरोधी खेमे की। इसके बाद 23 मई को दूसरी मिली जीत का श्रेय कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को मिला। जीत का यह श्रेय भी आसानी से नहीं मिला।

जब सुरेश खन्ना ने शुरू किया काम

सुरेश कुमार खन्ना ने कृष्णाराज समर्थकों की शिथिलता देखी तो दूसरे दलों से प्रभावशाली लोगों को भाजपा ज्वाइन करानी शुरू कर दी। इसमें बसपा से भाजपा में आए कटरा के राजीव कश्यप, बसपा से इस्तीफा देकर पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा ने खूब मदद की। सपा छोड़कर भाजपा में आए मिथलेश कुमार ने अपना दिल खोल दिया। भाजपा के विधायकों को भी एक्टिवेट कर दिया गया। चारों ओर से कड़ी किलेबंदी की गई। खुद सुरेश कुमार खन्ना ने बूथ प्रबंधन तक की समीक्षा की। रात में जब प्रत्याशी अरुण सागर अपने आवास पर होते थे, तब एक बजे और दो बजे भी सुरेश कुमार खन्ना गाड़ी में गनर और ड्राइवर के साथ आते-जाते दिखे।

पीलीभीत और बरेली पर भी टिकाए रहे नजर

सुरेश कुमार खन्ना ने शाहजहांपुर की जिम्मेदारी तो उठाई ही साथ ही वह प्रभारी होने के नाते पीलीभीत और बरेली की सीट पर बराबर नजर लगाए रहे। मतदान का दिन हो या फिर मतगणना का दिन हो, सुरेश खन्ना ने एक पल चैन नहीं लिया। खुद ही सारी व्यवस्थाओं पर नजर रख कर आखिरकार नेतृत्व से किए गए वायदे को उन्होंने पूरा कराया। इस बीच जब दूसरे दलों से दिग्गज नेताओं की भाजपा में सुरेश कुमार खन्ना ने एंट्री कराई तब उनकी पार्टी में आलोचना भी की गई, पर उनकी यह मजबूरी थी, जब पार्टी के लोग सक्रिय नहीं हो रहे थे, तब उन्होंने दूसरे नेताओं की एंट्री भाजपा में करा कर सुस्त लोगों को चुस्त कर दिया। इस पूरे चुनाव में सुरेश कुमार खन्ना ने खुद को राजनीति का महापंडित साबित कर दिया।

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