सभी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मान से याद करें: डॉ. खुराना
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मदरसा नुरुल हुदा में 'हिंदुस्तान की आजादी में मदरसों और उलमा का किरदार' विषय पर विचार गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने मदरसों के योगदान और विद्यार्थियों से देश की एकता का आह्वान किया। डॉ. खुराना और डॉ. सिद्दीकी ने स्वतंत्रता संग्राम के विविध योगदानों पर प्रकाश डाला।

शाहजहाँपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मदरसा नुरुल हुदा, बिजलीपुरा में ‘हिंदुस्तान की आजादी में मदरसों और उलमा का किरदार’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में मदरसों और उलमा के योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों से देश की एकता और अखंडता मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विकास खुराना ने कहा कि विद्यार्थियों को देश के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास सही तथ्यों के साथ पढ़ाया जाना चाहिए। सभी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मान के साथ याद किया जाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा प्राप्त कर देश की तरक्की में योगदान देने का आह्वान किया।
अतिथि विचार
मुख्य अतिथि जीएफ कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. मंसूर सिद्दीकी ने कहा कि हिंदुस्तान की आजादी किसी एक वर्ग या समुदाय के संघर्ष का परिणाम नहीं थी, बल्कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों की साझा कुर्बानियों का नतीजा थी। स्वतंत्रता आंदोलन में अनेक उलमा और मदरसों से जुड़े लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने जेल की यातनाएं सहीं और देश की आजादी के लिए प्राणों का बलिदान दिया।
राजू बग्गा और अजय अवस्थी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में इज़हार हसन, जहूर अहमद, कामरान हुसैन, मोहम्मद जाहिद, साजिद अली, शारिक अली खान, मोइन खान, रिज़वान अहमद, मुख्तार अहमद, अब्दुल कादिर, शारिक अली और हैदर अली मौजूद रहे।


