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मतदान कर सशक्त सरकार को चुने, व्यवस्था को दोष न दें

मतदान कर सशक्त सरकार को चुने, व्यवस्था को दोष न दें

जिस दिन मतदान होता है, उस दिन छुट्टी मानते हुए घर में मौज करते हैं या फिर पोलिंग बूथ की लंबी लाइन को देखकर वोट नहीं देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है, यह दिन हमें बेहतर सरकार को चुनने का अधिकार देने वाला होता है।

हम पहले मतदान नहीं कर अपने कर्तव्यों और अधिकारों का प्रयोग करने से गुरेज करते हैं और फिर व्यवस्था को दोषी ठहराते हैं। जरूरत, इस बात की है कि बेहतर शासक को चुनने के लिए वोट डालने के लिए पास के नजदीकी बूथों पर जाएं और अपने अधिकार का प्रयोग करें।यह कहना है आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डा.कनक रानी का। उन्होंने मतदान को जनता की आवाज बताया।

कहा कि अपने वोट के जरिए एक अच्छा नेता और बेहतर सरकार को चुनते हैं। यह सब वोट डालने के बाद ही निश्चित हो सकता है। मतदान हर व्यक्ति को करना चाहिए, चाहे वह सशक्त हो या असशक्त। क्योंकि, उसका मस्तिष्क चल रहा होता है। हर उम्र के व्यक्ति को मतदान करने के लिए आगे आना चाहिए।

मतदान के प्रति उदासीनता नहीं दिखाएं-

कनक रानी ने वोट डालने में उदासीनता नहीं दिखाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वोटिंग वाले दिन आराम नहीं करें। सारे काम काज को छोड़कर वोट डालने जरूर जाएं। मातृ शक्ति की वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में काफी अहम रोल अदा कर सकती हैं। वह तय कर लें कि जब तक घर के सभी लोग वोट नहीं डाल देते, खाना-पीना नहीं दिया जाएगा। पहले अधिकार के साथ मतदान करें, यह कर्तव्य भी है। एक कर्तव्य को पूरा करने से व्यवस्था में बदलाव कर सकते हैं।

शहर की जनता वोट के प्रति हो जागरूक-

आमतौर पर देखा जाता है कि शहर वाले वोट के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। वहीं गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और युवा लाइन में लगकर वोट डालकर अपने कर्तव्य को पूरा करते हैं। प्राचार्य डा.कनक रानी ने बताया कि मतदान वाला दिन एक हवन कुंड है। इसदिन मतदान रुपी आहुति डालकर सभी को तटस्थता दिखाना चाहिए। सभी लोगों के वोट नहीं डालने की वजह से वोट प्रतिशत काफी कम रह जाता है।

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  • Web Title:Select a powerful government by voting and not blame the system