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नदी नहीं, यहां तो नाला बन कर बह रही है गर्रा

नदी नहीं, यहां तो नाला बन कर बह रही है गर्रा

नदी...यह शब्द जैसे ही जेहन में आता है, अब कल्पना बड़ी से, लंबी सी, महिला की साड़ी की तरह लहराती हुई, स्वच्छ निर्मल जल से भरी हुई नदी होती है। पर हालात इस वक्त बिल्कुल उलट हैं। नदी का मतलब अब कुछ और है। लंबी सी, पतली सी, काले पानी वाली, कीचड़ से लबालब नाले जैसी तस्वीर ही देखने को मिलती है, जिसे हम सब नदी कहते हैं। हालात कुछ अलग-अलग हो सकते हैं, पर हाल जिले की छह बड़ी नदियों के नाले जैसे ही हैं।रामगंगा नदी और बहगुल नदी में भी पानी न के बराबर है। कोई भी आराम से नदी को चल कर पार कर सकता है। इतना पानी ही नहीं है इन दोनों नदियों में किसी को तैरना पड़े। कोई नदी में अगर डूबना भी चाहे तो उसे निराश होना पड़ेगा, क्योंकि नदियों में डूबने भर का भी पानी नहीं है। सबसे पहले कहानी सुनिए रामगंगा नदी की। रामगंगा नदी मिर्जापुर, कलान ब्लाक के तमाम गांवों के किनारे से होकर बहती रही है। इस वक्त नदी में पानी न के बराबर है। लोगों ने पालेज लगा रखी है। कोई तरबूज बोए है तो कोर्ई खीरा और ककड़ी। नदी में कहीं-कहीं तो पानी है। कहीं पर ज्यादा है तो कहीं पर कम है। नदी के दूसरी ओर जाना है तो नाव की जरूरत नहीं है। ऐसे ही नदी पार की जा सकती है। यही रामगंगा नदी बरसात में विकराल रूप दिखाती है। गांव के गांव काटती जाती है। तब इसमें इतना पानी होता है कि चारों ओर तबाही मच जाती है। पर गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी से रामगंगा नदी जूझ रही है। चारों ओर रेत ज्यादा और पानी कम ही मिलता है।रामगंगा के बाद गोमती नदी की दशा तो बहुत ही खराब है। इस नदी का जो रूप आप लखनऊ में देखते हैं, वह रूप कहीं और नहीं दिखेगा। लखनऊ में यह नदी जितनी सुंदर दिखती है, शाहजहांपुर में यह नदी उतनी ही कुरूप है। कुरूप इसलिए कहेंगे, क्योंकि इस नदी का अस्तित्व ही कहीं-कहीं मिटता हुआ देखा जा सकता है। गोला जाते वक्त मोहम्मदी के आगे पुल के पास से इस नदी को नाले के रूप में देखा जा सकता है। लोग नदी की जमीन पर खेती कर रहे हैं। हर बार जुताई होने पर लोग नदी की चौड़ाई को कम कर देते हैं, इसलिए यह नदी अब नाले जैसे दिखती है। यह भी कह सकते हैं कि नदी में उतना भी पानी नहीं है, जितना नाले में बहता रहता है।शाहजहांपुर की गर्रा नदी की दशा को देख कर पर्यावरण प्रेमी तो रो ही देगा, नदी की अच्छी खासी चौड़ाई है, लेकिन पानी एक नाले के बराबर के हिस्से में बहता दिखता है। सही बात तो यह है कि नदी की जगह में नाला बह रहा है। नदी की जमीन पर बह रहे नाले में घरों का गंदा पानी ही है। पूरी नदी सूखी पड़ी है। पानी केवल बरसात में ही देखने को मिलता है। बाकी दिनों में नदी की जमीन पर लोगों को अवैध निर्माण करते और बच्चों को क्रिकेट खेलते देखा जा सकता है। इसी तरह से शहर से सट कर निकली खन्नौत नदी में पूरा एक मीटर तक पानी नहीं है। इसमें अधिकतर नहरों से आया हुआ पानी ही बहता है। इस खन्नौत नदी में जो भी पानी बहता है, वह इतना गंदा होता है कि कोई भी अगर नहा ले तो उसे चर्म रोग हो जाएगा। अभी जब फरवरी में योगी आदित्यनाथ को आना था, तब अफसरों ने सिंचाई विभाग से इस नदी में पानी छुड़वाया था, ताकि सीएम को गंदा पानी न देखने को मिले। इस नदी में शहर के अधिकांश नालों का ही पानी बहता है। इस नदी के बंकाघाट को पाटने में नगरनिगम लगा हुआ है। लगातार कूड़ा डाला जा रहा है, लोग कब्जा करने में लगे हैं। शाहजहांपुर का जिला प्रशासन सबकुछ देखने के बाद भी खामोश है।

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  • Web Title:Not a river, here is the drain