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22 जनवरी, 2020|2:43|IST

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गुरुजी की अजब कहानी, मंच पर पत्नी को कहते मां जी

गुरुजी की अजब कहानी, मंच पर पत्नी को कहते मां जी

अभिनव एंड आर्टिस्ट संस्था के निर्देशक व लेखक शैलेन्द्र सच्चू ने कभी सपने में न सोचा होगा कि जिस लड़की को अद्र्धागिनी बनाकर घर में ला रहे हैं। उसी को मंच पर मां जी कहकर पुकारना पड़ेगा। पति-पत्नी के रोल को दर्शक पसंद कर खूब तालियां बजाकर उत्साह करते हैं।

शैलेंद्र सिंह सच्चू पेशे से शिक्षक हैं। उत्क्रमित मध्य विद्यालय चंदाशाहपुर भोजपुर में बच्चों को पढ़ाते हैं। बचपन से थियेटर से लगाव था। जिसे वह छोड़ नहीं पाए। पिछले साल शाहजहांपुर रंग महोत्सव में रश्मिरती नाटक से पहला पुरस्कार भी झटका था। मास्टर जी की शादी 2011 में शांति कुमारी से हुई थी। शुरुआती दिनों में शांति की जिंदगी हाउस वाइफ के रूप में चली। लेकिन, धीरे-धीरे शांति को भी थियेटर का चस्का लग गया। शुरुआत नुक्कड़ नाटक से की। दहेज प्रथा पर आधारित पहला नाटक खेला। वह खूब हिट हुआ। स्वच्छ भारत, हरियाली मिशन भी खूब सराहे गए। अब शांति कुमारी ने पति के साथ नाटक करने की ठान ली। उसी बीच रश्मिरती नाटक की पटकथा लिखी गई थी। उसमें शैलेंद्र सच्चू मुख्य रोल में थे। मां का रोल करने को कोई बेहतर कैरेक्टर की तलाश थी। फिर क्या था, सच्चू ने पत्नी शांति कुमार को मौका दिया। घर में सुनो जी... कहने वाली शांति कुमारी मंच पर पति को बेटा कहने लगी। मंच के मां-बेटे की जोड़ी हिट हुई। इस नाटक का मंचन ताज महोत्सव समेत कई जगहों पर किया गया।शैलेंद्र सच्चू ने बताया कि वह अपनी स्कूल से मिलने वाली सीएल का बखूबी प्रयोग साल में दो बार महोत्सव में नाटक करने के लिए करते हैं। उनकी एक बेटी भी है, जिसका नाम शशा कुमार है। शैलेंद्र की टीम रंग महोत्सव में एबीसी नाटक करने को आई। जिसकी थीम सामाजिक व्यवस्स्था पर चोट करने वाली है।

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  • Web Title:Guruji s strange story I told my wife on stage