first day of roja completes - मुकद्दस रमजान का पहला रोजा मुकम्मल DA Image
6 दिसंबर, 2019|9:18|IST

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मुकद्दस रमजान का पहला रोजा मुकम्मल

मुकद्दस रमजान का पहला रोजा मुकम्मल

माह-ए-रमजान का पहला रोजा मुकम्मल हो गया। मोमिनों ने मुकददस महीने का पहला दिन इबादतों में गुजारा। जिले की तमाम मस्जिदों में नमाजियों की तादाद में इजाफा देखा गया। रमजान के चांद का दीदार होते ही इबादत का सिलसिला शुरू हो गया। मुसलमान अपने परवर दिगार के हुक्म के मुताबिक सहरी से लेकर तराबीह तक इबादत में मशगूल दिखे। सभी मस्जिदों में बच्चों से लेकर जवानों और बूढ़ों की भीड़ उमड़ने लगी। घरों में इफ्तार के लिए लोगों ने तरह-तरह के पकवान बनाए। मगरिब की अजान से पहले मस्जिदों में इफतार के लिए रोजादार कतार में बैठ गए। सामने रखे पकवान और रोजादार अल्लाह से दुआ में मसरूफ दिखे। जैसे ही मोअज्जिन ने मगरिब की अजान पढ़ी, सभी ने खजूर से इफ्तार किया। उसके बाद चाट-पकौड़ी, फल, पापड़ खाने और शर्बत-शिकंजी बगैरह पिया गया। फिर मगरिब की नमाज अदा की गई और मुल्क में अमन चैन की दुआएं मांगी गईं। सुबह मौसम रहा खुशगवार रविवार को सुबह से आसमान में बादल छाने और बारिश की हल्की फुहारों ने मौसम खुशगवार बना दिया। जिसकी वजह से हवा में ज्यादा गर्मी नहीं थी। बदले हुए मौसम के मिजाज ने रोजादारों को थोड़ी राहत जरूर दी। दो तराबीह हुईं पूरी शनिवार को रमजान का चांद दिखने के बाद इशा की नमाज के साथ तराबीह की नमाज अदा की गई। शहर की मस्जिदों में छह से लेकर पूरे रमजान तराबीह की नमाज में कुरआन-ए-पाक सुनाया जाएगा। हदीस की रोशनी में रमजान -हदीस के मुताबिक जिस रोजादार ने झूठ बात और बुरे काम को नहीं छोड़ा तो अल्लाह को उसके खाना-पीना छोड़ने की परवाह नहीं।-हदीस-ए-पाक है कि अगर मेरी उम्मत को पता चल जाए कि रमजान में क्या-क्या नेअमतें हैं तो पूरा साल रमजान होने की तमन्ना करें।-हदीस के मुताबिक मादह तमाम बीमारियों की जड़ है और इसका इलाज उसको खाली रखना है, यह चीज रोजे से हासिल की जा सकती है।

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