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शाहजहांपुरवैक्टरजनित बीमारियों से बचने के लिए मच्छरों से जंग

हिन्दुस्तान टीम,शाहजहांपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:30 AM
वैक्टरजनित बीमारियों से बचने के लिए मच्छरों से जंग

मच्छरों से बचने के लिए सावधानी बरतें। क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण से उबरने में लोगों का ध्यान अन्य बीमारियों से हट गया है। जबकि गर्मी बढ़ते ही मच्छरों की तादाद बढ़ने लगी है। मच्छर कई प्रकार की संक्रामक बीमारियां होती हैं। मच्छरों से होने वाली बीमारियों में से एक मलेरिया है, जिसका इलाज समय रहते नहीं किया गया तो यह जानलेवा भी हो सकती है।

बीमारियों से बचाव को जागरुकता की जरुरत

मच्छरों की संख्या बढ़ जाने के कारण वेक्टर जनित रोग बढ़ने लगते हैं। इसलिए अब हमें कोरोना के साथ-साथ मलेरिया, जेई, डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव की जरूरत है। वर्तमान में पूरा स्वास्थ्य विभाग कोरोना के संक्रमण के फैलाव को रोकने और मरीजों के इलाज में जुटा है। इसलिए जन समुदाय को वेक्टर जनित बीमारियों से बचने के लिए खुद से जागरूक होने की जरूरत है।

मलेरिया अधिकारी ने की अपील

जिला मलेरिया अधिकारी डा. पीके श्रीवास्तव ने बताया कि नगर पंचायतों में नगर पालिका के सहयोग से नियमित रूप से गली- मोहल्लों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। अधिक व्यस्तता होने के कारण इस बार मच्छरों से बचने के लिए जन समुदाय को स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ जनपद वासियों को सामाजिक दूरी बनाकर लोगों को जागरूक करने की अपील की। बदलते मौसम में मच्छरों से बचने के लिए सावधानियां बरतनी चाहिए।

यह बरतें सवाधानियां

अपने घरों व घरों के आस-पास पानी इकट्ठा न होने दें। घर की साफ-सफाई एवं व्यक्तिगत साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। मच्छर पानी में पनपते हैं। और रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। इसलिए रूके हुए पानी के स्थान को हो सके तो मिट्टी डालकर बंद कर दें या उस रुके हुए पानी में मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल डाल द९ं, जिससे मच्छरों का लार्वा नालियों और ठहरे हुए पानी में पनपने न पाएं। मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहने। छत पर टूटे फूटे बर्तन, टायर, फूलदान, पाइप आदि में पानी न भरने दें। फ्रिज कूलर आदि को साप्ताहिक में साफ करते रहें।

क्या है मलेरिया

मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो एनाफिलीस मादा मच्छर के काटने से फैलती है। इससे निकलने वाले प्रोटोजुअन प्लाज्मोडियम शरीर के ब्लड के साथ मिलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे शरीर में खून की कमी होने लगती है। मलेरिया के कीटाणु दो तरह के होते हैं। पहला प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम (पीएफ) जो कभी जानलेवा हो सकता है। दूसरा प्लाज्मोडियम वाईवेक्स (पीवी) यह सामान्य मलेरिया होता है। इन दोनों बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सही समय पर उचित इलाज तथा उचित चिकित्सकीय सहायता द्वारा ठीक किया जा सकता है। मलेरिया की जांच और इलाज सभी सीएचसी-पीएचसी व जिला अस्पताल में नि:शुल्क किया जाता है।

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