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24 अक्तूबर, 2020|5:24|IST

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डॉक्टर, इंजीनियर, किसानों ने मिलकर जिंदा कर दी भैंसी नदी

डॉक्टर, इंजीनियर, किसानों ने मिलकर जिंदा कर दी भैंसी नदी

1 / 3शाहजहांपुर के डाक्टर, इंजीनियरों, किसानों ने मिलकर मृतप्राय भैंसी नदी का पुनर्जीवित कर दिया है। करीब 65 किलोमीटर लंबी इस नदी में 30 किलोमीटर तक पानी की धार बह रही...

डॉक्टर, इंजीनियर, किसानों ने मिलकर जिंदा कर दी भैंसी नदी

2 / 3शाहजहांपुर के डाक्टर, इंजीनियरों, किसानों ने मिलकर मृतप्राय भैंसी नदी का पुनर्जीवित कर दिया है। करीब 65 किलोमीटर लंबी इस नदी में 30 किलोमीटर तक पानी की धार बह रही...

डॉक्टर, इंजीनियर, किसानों ने मिलकर जिंदा कर दी भैंसी नदी

3 / 3शाहजहांपुर के डाक्टर, इंजीनियरों, किसानों ने मिलकर मृतप्राय भैंसी नदी का पुनर्जीवित कर दिया है। करीब 65 किलोमीटर लंबी इस नदी में 30 किलोमीटर तक पानी की धार बह रही...

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शाहजहांपुर के डाक्टर, इंजीनियरों, किसानों ने मिलकर मृतप्राय भैंसी नदी का पुनर्जीवित कर दिया है। करीब 65 किलोमीटर लंबी इस नदी में 30 किलोमीटर तक पानी की धार बह रही है, जिससे दो हजार हेक्टेयर खेती योग्य जमीन की सिंचाई हो रही है, साथ ही करीब 40 तालाबों में पानी भी भरा जा चुका है। आगे के 35 किलोमीटर में कुछ बाधाओं के कारण पानी नहीं आ रहा है। पर सभी स्वयंसेवियों का प्रयास भैंसी नदी की धार को गोमती तक लाने का जारी है।

यह बात करीब डेढ़ साल पहले की है, जब इंजीनियर संजय उपाध्याय और उनके कुछ साथियों ने प्रतीकात्मक रूप से भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास शुरू किए थे। इसके लिए उन्होंने भैंसी नदी के उदगम और गोमती के संगम पर खुदाई प्रारंभ की। पौधारोपण किया। पर वहां ग्रामीणों की इन सभी स्वयंसेवियों से उम्मीदें बंध गईं। तब इस नदी को पूरी तरह से पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया। इस काम में संजय का बड़ा सहयोग किया नन्हे नाम के एक बिजली कर्मी एक लाइनमैन ने। तब नन्हेलाल ने आसपास के गांवों में टाफियां और पीले चावल घर घर बांटे और ग्रामीणों को नदी की खुदाई में कारसेवा के लिए आमंत्रित किया था। इसका असर देखने को मिला। जब पहले दिन कारसेवा शुरू हुई तो करीब पांच सौ ग्रामीण फावड़ा लेकर आए थे। पहले दिन भैंसी नदी की करीब 150 मीटर खुदाई की गई। इसके बाद नदी की लंबाई तो बहुत थी, न जाने कितनी ही जगहों पर अतिक्रमण था, लोगों ने नदी को खेत बना लिया था।

नदी के रास्ते के 45 गांवों का सर्वे

संजय उपाध्याय, डा. विजय पाठक जैसे अनगिनत नाम इस भैंसी नदी के पुनर्जीवित करने के काम में जुड़ते जा रहे थे। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ती जा रही थीं। तब इंजीनियर संजय ने एक टीम का गठन किया। इस टीम ने नदी के रास्ते और उसके आसपास के 45 गांवों का सर्वे किया। ग्रामीणों के बीच गए। जिन्होंने अतिक्रमण कर रखा था, उन्हें समझाया, नदी के पुनर्जीवित होने से फायदे बताए। यह कारवां बढ़ता गया। हर रविवार को अलग अलग गांवों के लोग कारसेवा करने लगे। इतना सब बिना सरकारी सहायता के हुआ। डीएम, सीडीओ ने भी जाकर फावड़े से नदी की खुदाई कर सभी का प्रोत्साहन किया।

उदगम से सात किमी पर रुक गया काम

=दरअसल भैंसी नदी का उदगम स्थल पीलीभीत के भैंसासुर तालाब से हुआ है। बार्डर पर गांव पड़ता है नवादा डाह। इस गांव के लोगों ने नदी की आगे खुदाई नहीं होने दी। संजय उपाध्याय और उनकी टीम ने यह संकल्प ले रखा था कि वह खुदाई न करने देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कराएंगे। उन्हें काफी समझाया गया, लेकिन नवादा डाह के लोग यह मानने को तैयार ही नहीं हुए कि कभी नदी गांव से होकर गुजरती थी। इस कारण उदगम स्थल से भैंसी नदी में पानी लाना बेहद कठिन हो गया, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी।

बंडा के शारदा से लाए पानी

जब नवादा डाह के लोगों ने अपने गांव में खुदाई नहीं करने दी, तब टीम ने पानी के विकल्प खोजे। बंडा क्षेत्र में शारदा नहर के सीपेज से भरे तालाब दिखे। वहां सीपेज के कारण खेतों में भी पानी भरा रहता था। साथ ही टीम ने देखा कि जलभराव को समाप्त करने के लिए वहां पर पहले मनरेगा से नाले खोदे गए थे। उन नालों को टीम ने आपस में जोड़ने का काम किया, इसके साथ ही उस बंडा क्षेत्र के जलभराव की समस्या को भैंसी नदी में पानी लाकर समाप्त कराया। इस तरह से भैंसी नदी का पानी अब 30 किलोमीटर तक आ रहा है। अभी पुवायां क्षेत्र में इस नदी को गोमती संगम तक लाने की कोशिश जारी है।

लोकभारती संस्था के कार्य की सराहना की

इंजीनियर ,डाक्टर, ग्रामीणों, व्यापारियों ने भैंसी नदी के पुनर्जीवन का प्रयास लोकभारती संस्था के जरिए किया। संस्था का मकसद तो नदी को पुनर्जीवित करने का था ही, साथ ही लोगों को किसी कार्य के लिए एकजुट करना था। सहभागिता पर जोर देना था। यह मकसद पूरी तरह से कामयाब रहा। अभी नदी को उदगम से संगम तक ले जाने का कार्य पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इस संकल्प पूर्ण करने के लिए पूरी टीम एकजुट है।

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  • Web Title:Doctor Engineer Farmers together made the Buffalo River alive