Shahjahnpur News: अनजाने व्रत ने बना दिया गुणनिधि को कुबेर: प्रशांत
Shahjahnpur News: शाहजहांपुर में चल रही कथा में धन के देवता कुबेर की कथा सुनाते हुए कथा व्यास प्रशांत प्रभु ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गुणनिधि नाम का ब्राह्मण, जो जुए की आदत में पड़ गया था, भूख के कारण महाशिवरात्रि का व्रत अनजाने में किया और पुनर्जन्म में भगवान शिव का भक्त बना।

Shahjahnpur News: शाहजहांपुर। खिरनीबाग स्थित रामलीला मैदान में चल रही कथा में बुधवार को भक्ति और उत्सव का माहौल रहा। कथा व्यास प्रशांत प्रभु ने धन के देवता कुबेर की कथा सुनाते हुए भगवान शिव की महिमा और महाशिवरात्रि व्रत के पुण्य का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कभी गुणनिधि नाम का एक ब्राह्मण जुए की बुरी आदत में पड़ गया था। पिता को जानकारी हुई तो उन्होंने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद दर-दर भटकते हुए उसका जीवन बेहद कठिन हो गया। कथा व्यास ने बताया कि एक दिन भूख से व्याकुल गुणनिधि जंगल की ओर जा रहा था। रास्ते में उसे ब्राह्मणों का एक समूह दिखाई दिया, जो भोजन सामग्री लेकर शिवालय जा रहा था। गुणनिधि भी उनके पीछे-पीछे शिवालय पहुंच गया। वहां ब्राह्मणों ने भजन-कीर्तन किया और भोजन भगवान शिव को भोग के रूप में अर्पित किया। रात में भूख से परेशान गुणनिधि ने भोग में रखे भोजन में से कुछ चुराने का प्रयास किया। इसी दौरान एक ब्राह्मण ने उसे पकड़ लिया और शोर मचा दिया। वहां मौजूद लोगों ने उसे मारकर भगा दिया。
गुणनिधि का पुनर्जन्म
प्रशांत प्रभु ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि गुणनिधि महाशिवरात्रि के महत्व से अनजान था। भूख के कारण पूरे दिन भोजन नहीं कर सका और रात में शिवालय में ही रहा। इस तरह अनजाने में उससे महाशिवरात्रि का व्रत हो गया। बाद में उसकी मृत्यु हुई तो भगवान शिव के गणों ने उसके इस व्रत को पुण्य कर्म माना। इसी पुण्य के प्रभाव से उसे नया जन्म मिला।
भगवान शिव की कृपा
कथा व्यास ने बताया कि अगले जन्म में गुणनिधि कलिंग देश का राजा बना। पूर्व जन्म के पुण्य और संस्कारों के प्रभाव से वह भगवान शिव का महान भक्त बना। उसकी अटूट शिवभक्ति से प्रसन्न होकर भगवान महादेव ने उसे यक्षों का स्वामी और देवताओं का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। इसी तरह गुणनिधि भगवान शिव की कृपा से धन के देवता कुबेर के रूप में प्रसिद्ध हुए।


