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22 सितम्बर, 2020|8:28|IST

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कटरी के संचरी तरबूज का स्वाद नहीं ले सकेंगे दिल्ली वाले

कटरी के संचरी तरबूज का स्वाद नहीं ले सकेंगे दिल्ली वाले

कलान तहसील क्षेत्र से होकर गुजरने वाली रामगंगा नदी की कटरी में काले बीज वाले संचरी तरबूज की बड़े स्तर पर खैती होती है। हर बार यहां से दिल्ली, हरियाणा, कोलकाता और नेपाल तक तरबूज बिकने जाता था। यहां के तरबूज का स्वाद ही इतना अच्छा है कि बहुत डिमांड रहती है। पर इस बार दिल्ली, हरियाणा, कोलकाता, नेपाल वाले कटरी के तरबूज का स्वाद शायद ही ले सकें, क्योंकि लंबे समय से लाकडाउन है ऐसे में ट्रांसपोर्ट भी बंद है। इस कारण कटरी के तरबूज को शाहजहांपुर, बदायूं, बरेली वाले ही कम कीमत पर खरीद सकेंगे।

कलान तहसील क्षेत्र में तरबूज की फसल तैयार हो चुकी है। स्थानीय बाजार में तरबूज बिकने लगा है। लॉकडाउन के कारण तरबूज पैदा करने वाले किसान भी चिंतित है। कलान तहसील क्षेत्र के परौर में यहां रामगंगा नदी बहती है। रामगंगा किनारे कुंडरी, आश्रम, घावरिया, अमृतापुर, सोहण, दहिलिया, मई आदि गांव के लगभग पचास गांव लोग गंगा किनारे सैकड़ों बीघा जमीन पर पालेज के रूप में तरबूज के अलावा खीरा, ककड़ी, लौकी व कद्दू उगाते हैं। किसानों ने बताया कि हाईब्रीड काला संचरी तरबूज सबसे ज्यादा पैदा किया जाता है। संचरी तरबूज की मांग बाहर ज्यादा होती है। लाल सुर्ख रंग के साथ खाने में भी यह तरबूत बहुत मीठा होता है। किसान सुभाष ने बताया कि नेपाल से लेकर अपने देश के कई राज्यों में काला संचरी तरबूज की मांग रहती है। फोन पर ही सौदा का भाव हो जाता था। डीसीएम से तरबूज की सप्लाई होती थी। इसबार लाकडाउन के कारण तरबूज बाहर भेजना मुश्किल है। कलान जलालाबाद के अलावा आसपास के बाजारों में ही तरबूज बेचना पड़ेगा। तरबूज उगाने वाले किसान दरगाही ने बताया कि पिछले साल दूसरे प्रदेशों में तरबूज का रेट दस रुपए प्रति किलो था। एक तरबूज की कीमत लगभग तीस से चालीस रुपए हो जाती थी। लॉकडाउन के कारण आधी कीमत रह गई है।

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  • Web Title:Delhiites will not be able to taste the sanitary watermelon of Katri