प्रेम प्रसंग में बहन और उसके प्रेमी की हत्या करने के दोषी को सात साल की जेल
Shahjahnpur News - बहन और उसके प्रेमी की हत्या के मामले में दोषी सात साल की सजाशाहजहांपुर, विधि संवाददाता। जलालाबाद कस्बे में वर्ष 2022 में बहन और उसके प्रेमी की गोली मा

शाहजहांपुर। जलालाबाद कस्बे में वर्ष 2022 में बहन और उसके प्रेमी की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या 10 पंकज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए सात साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता श्रीपाल वर्मा ने पैरवी की और साक्ष्यों के आधार पर मामले को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। मामला 21 फरवरी 2022 का है। ग्राम ककरहा निवासी अनुज वर्मा ने थाना जलालाबाद में दी गई तहरीर में बताया था कि उसका भाई सनुज उर्फ सोनू दोपहर करीब साढ़े तीन बजे दुकान से घर खाना खाने आया था।
इसी दौरान गांव का मुलायम, जो अपनी बहन प्रीती के प्रेम संबंधों को लेकर शक में था, सोनू को अपने घर के अंदर खींच ले गया। आरोप था कि मुलायम ने तमंचे से सोनू को गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद उसने अपनी बहन प्रीती के सिर में भी गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया था कि घटना के बाद मुलायम ने खुद को बचाने और दूसरों को फंसाने के इरादे से अपने पिता के पैर में भी गोली मार दी। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना के बाद पुलिस ने धारा 302 समेत अन्य धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या 10 पंकज कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अन्य अभिलेखों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि घटना के पीछे तत्कालीन झगड़ा और उकसावे की स्थिति प्रमुख कारण रही।---कोर्ट ने कहा, परिस्थितियों में उत्पन्न विवाद में किया कृत्यअदालत के अनुसार, अभियुक्त का उद्देश्य सुनियोजित तरीके से हत्या करना नहीं था, बल्कि परिस्थितियों में उत्पन्न विवाद के चलते उसने यह कृत्य किया। इसी आधार पर अदालत ने धारा 302 के आरोप को सिद्ध न मानते हुए आरोपी को धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) तथा 3/27 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। निर्णय में अदालत ने आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ सात हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही जुर्माने की राशि में से छह हजार रुपये वादी पक्ष के विधिक वारिसों को प्रतिकर के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं।
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