यूपी के चार जिलों के बाद अब शाहजहांपुर में भी काले आलू की खेती

Feb 13, 2026 12:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, शाहजहांपुर
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Shahjahnpur News - डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह को काला आलू भेंट करते प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा व उनके भतीजे।टैग:: खेती-किसानी-अब शाहजहांपुर कांट में प्रगतिशील किसान कौ

यूपी के चार जिलों के बाद अब शाहजहांपुर में भी काले आलू की खेती

शाहजहांपुर। प्रयागराज, उन्नाव, बहराइच और रायबरेली में पहचान बना चुकी काले आलू की खेती अब शाहजहांपुर जिले तक पहुंच गई है। पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर मानी जाने वाली यह उन्नत किस्म पारंपरिक आलू की तुलना में अलग बाजार बना रही है। किसानों का रुझान इस ओर बढ़ रहा है और जिले में इसे फसल विविधीकरण के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इसकी शुरुआत प्रयागराज के मंसूरपुर गांव से हुई। इसके बाद उन्नाव के गंगादासपुर में रायबरेली से बीज लाकर उत्पादन शुरू हुआ। बहराइच और रायबरेली में भी मुख्य रूप से कुफरी नीलकंठ प्रजाति उगाई जा रही है।

अब शाहजहांपुर के कांट क्षेत्र में प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा ने इसकी खेती शुरू की है। सामान्य आलू की तुलना में इसमें एंथोसाइनिन अधिक और ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम बताया जा रहा है, जिससे बाजार में इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डाॅ. संजीव पाठक ने बताया कि इस फसल को गन्ने के साथ सहफसली खेती के रूप में भी किसान कर सकते हैं। कांट के कौशल मिश्रा इसके उदाहरण भी हैं। उन्होंने बताया कि शोध संस्थान में आने वाले किसानों को उनके खेत का भ्रमण कर इसे वृहद पैमाने पर करने के लिए प्रेरित भी किया जाता है। डीएम ने किया उत्साहवर्धन, कलेक्ट्रेट पहुंचकर भेंट की फसल कांट। काले आलू के उत्पादन को लेकर कांट के प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा और उनके भतीजे गौरव मिश्रा को डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बधाई दी। उत्पादन के बाद कौशल मिश्रा कलेक्ट्रेट पहुंचकर फसल भेंट की। नई और अलग किस्म की खेती को देखकर डीएम ने इस नवाचार पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि परंपरागत फसलों के साथ ऐसे प्रयोग किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलते हैं। लीक से हटकर खेती करने की पहल की सराहना करते हुए डीएम ने दोनों किसानों का उत्साहवर्धन किया। उपज लगभग बराबर, दाम कम से कम तीन गुना कांट। सामान्य आलू की औसत उपज 250 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मानी जाती है। काले आलू की पैदावार भी करीब 200 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई जा रही है, यानी उत्पादन के स्तर पर दोनों में बड़ा अंतर नहीं है। अंतर बाजार मूल्य में दिखाई देता है। काला आलू सामान्य आलू की तुलना में कम से कम तीन गुना तक कीमत पर बिक रहा है। पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इस कारण किसानों के लिए फायदेमंद फसल है। -काले आलू की विशेषता- -इसमें एंथोसाइनिन नामक तत्व अधिक मात्रा में होता है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है। -यह खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करने में मदद कर सकता है और हृदय स्वास्थ्य बेहतर करता है। -इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए सीमित विकल्प हो सकता है। -सामान्य आलू की तुलना में इसमें फाइबर अधिक होता है, जो कब्ज की समस्या कम करने में सहायक है। -विटामिन C और अन्य पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मधुमेह रोगी डॉक्टर की सलाह से खाएं।

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